परिवार के सदस्य की मृत्यु के बाद आधार डीएक्टिवेट करना क्यों जरूरी है? जान लें इसका आसान प्रोसेस

Aadhaar Card News: किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार सक्रिय रहना गलत इस्तेमाल और पहचान की धोखाधड़ी का कारण बन सकता है. इसी को रोकने के लिए UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने आधार निष्क्रिय यानी डीएक्टिवेट करने की प्रक्रिया शुरू की है.

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मृत व्यक्ति का आधार क्यों कर देना चाहिए डीएक्टिवेट?

Aadhaar Card News: भारत में आधार कार्ड पहचान का एक बहुत महत्वपूर्ण दस्तावेज है. इसका उपयोग सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, मोबाइल कनेक्शन, पेंशन, सब्सिडी और कई अन्य सेवाओं में किया जाता है. ऐसे में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार सक्रिय रहना गलत इस्तेमाल और पहचान की धोखाधड़ी का कारण बन सकता है. इसी को रोकने के लिए UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने आधार निष्क्रिय यानी डीएक्टिवेट करने की प्रक्रिया शुरू की है. UIDAI के अनुसार, अब तक 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय किए जा चुके हैं. इसका उद्देश्य आधार डेटाबेस की सुरक्षा बनाए रखना और सरकारी लाभों के दुरुपयोग को रोकना है.

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मृत्यु के बाद आधार निष्क्रिय करना क्यों जरूरी है?

किसी व्यक्ति के निधन के बाद अगर उसका आधार सक्रिय रहता है, तो कोई दूसरा व्यक्ति उसका गलत इस्तेमाल कर सकता है. जैसे-

  • सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना
  • पेंशन या सब्सिडी लेना
  • फर्जी पहचान के जरिए धोखाधड़ी करना

इसीलिए PIB (प्रेस सूचना ब्यूरो) के अनुसार, मृत्यु के बाद आधार को निष्क्रिय करना बेहद जरूरी है ताकि पहचान से जुड़ी धोखाधड़ी रोकी जा सके.

परिवार के सदस्य की मृत्यु की जानकारी कैसे दें?

UIDAI ने इसके लिए myAadhaar पोर्टलपर 'Reporting of Death of a Family Member' नाम से एक ऑनलाइन सुविधा शुरू की है.

इस प्रोसेस में- 

  • परिवार के सदस्य को पहले खुद का प्रमाणीकरण करना होता है.
  • मृत व्यक्ति का आधार नंबर देना होता है.
  • मृत्यु पंजीकरण संख्या (Death Registration Number) भरनी होती है और 
  • कुछ अन्य सामान्य जानकारी देनी होती है.

जानकारी की जांच के बाद UIDAI आधार को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया पूरी करता है.

आधार में धोखाधड़ी रोकने के लिए किए गए अन्य तरीके 

UIDAI ने आधार सुरक्षा को मजबूत करने के लिए और कई कदम उठाए हैं. जैसे-

  • बायोमेट्रिक लॉक की सुविधा, जिससे कोई बिना अनुमति आधार का उपयोग न कर सके.
  • फेस ऑथेंटिकेशन में लाइवनेस डिटेक्शन, जिससे नकली फोटो या वीडियो से धोखाधड़ी रोकी जा सके.
  • आधार सिक्योर QR कोड और पेपरलेस ऑफलाइन e-KYC.
  • आधार डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एन्क्रिप्टेड डेटा वॉल्ट का अनिवार्य उपयोग.

UIDAI किसी भी स्थिति में आधार धारकों की कोर बायोमेट्रिक जानकारी साझा नहीं करता है.

ऐसे में परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु के बाद उसका आधार निष्क्रिय कराना न सिर्फ कानूनी रूप से सही है, बल्कि यह समाज और सरकारी सिस्टम दोनों के लिए जरूरी है. इससे धोखाधड़ी रुकती है और सरकारी लाभ सही लोगों तक पहुंचते हैं. अगर आपके परिवार में ऐसी कोई स्थिति है, तो समय रहते myAadhaar पोर्टल पर जानकारी जरूर अपडेट करें.
 

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