Rainbow Nation: “रेनबो नेशन” दक्षिण अफ्रीका का एक मशहूर उपनाम है. इसका मतलब है कि यह देश संस्कृति, जाति, धर्म और भाषाओं के मामले में बहुत विविधता वाला देश है यानी एक देश में कई रंग, जैसे इन्द्रधनुष में होते हैं. यह शब्द 1990 के दशक में आर्कबिशप डेसमंड टूटू ने इस्तेमाल किया था. उन्होंने यह नाम इसलिए दिया ताकि दक्षिण अफ्रीका में अपार्थाइड (नस्लभेद) खत्म होने और देश के लोकतंत्र की ओर बढ़ने की खुशी और एकता को दिखाया जा सके.
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रेनबो नेशन शब्द की शुरुआत कैसे हुई?
“रेनबो नेशन” शब्द दक्षिण अफ्रीका के लिए इसलिए बनाया गया था, ताकि वहां मौजूद विभिन्न संस्कृतियों, जातियों और समुदायों को एक साथ दिखाया जा सके. दक्षिण अफ्रीका ने कई सालों तक अपार्थाइड (नस्लभेद) सहा, जिसमें लोगों को उनकी नस्ल के आधार पर अलग किया जाता था. अपार्थाइड खत्म होने के बाद देश को एक ऐसा समाज बनाना था जहां सभी लोग मिल-जुलकर, शांति से रह सकें. इसी विचार को समझाने के लिए इन्द्रधनुष का उदाहरण दिया गया. जैसे अलग-अलग रंग मिलकर एक सुंदर इन्द्रधनुष बनाते हैं, वैसे ही ब्लैक, व्हाइट, इंडियन और कलर्ड जैसे सभी समुदाय एक साथ मिलकर देश को मजबूत बना सकते हैं.
दक्षिण अफ्रीका में ग्यारह आधिकारिक भाषाएं हैं, जिनमें ज़ुलु, खोसा, अफ्रीकंस और अंग्रेजी शामिल हैं. यह भाषाएं देश की गहरी सांस्कृतिक पहचान दिखाती हैं. देश में अलग-अलग धर्म, पारंपरिक रीति-रिवाज, आधुनिक जीवनशैली, रंग-बिरंगे त्योहार, संगीत, भोजन और कला, सब मिलकर इसे दुनिया के सबसे विविध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देशों में शामिल करते हैं.
आज के समय में “रेनबो नेशन” का महत्वदक्षिण अफ्रीका को “रेनबो नेशन” कहा जाना आज भी लोगों को एकता और गर्व का एहसास कराता है. यह पहचान देश के लोगों को जोड़ती है और बताती है कि अलग-अलग पृष्ठभूमि के बावजूद सभी शांतिपूर्वक साथ रह सकते हैं. हालांकि, देश में आर्थिक असमानता और सामाजिक तनाव की चुनौतियां हैं, फिर भी दक्षिण अफ्रीका के लोग मिलकर रहने की अपनी परंपरा को बनाए रखते हैं. यह उपनाम दुनियाभर के लोगों को दक्षिण अफ्रीका की विशेष सांस्कृतिक पहचान, विभिन्न जातियों और विविध जीवनशैली के बारे में जानने के लिए आकर्षित करता है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है.














