Indian Railways: भारत में रेलवे तेजी से बदल रहा है और अब तकनीक के मामले में भी नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं. उत्तराखंड में बन रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना (Rishikesh-Karnaprayag rail project) इसका एक शानदार उदाहरण है. इस प्रोजेक्ट के तहत देश का पहला ऐसा रेल टनल जंक्शन बनाया जा रहा है, जो भूकंप आने पर भी सुरक्षित रहेगा. इसी तकनीक के कारण इसे 'फ्लोटिंग टनल जंक्शन' कहा जा रहा है.
क्या है फ्लोटिंग टनल जंक्शन?
इस खास टनल जंक्शन को ब्यासी और देवप्रयाग के बीच बनाया जा रहा है. आमतौर पर टनल मजबूत चट्टानों पर बनाई जाती हैं, लेकिन यहां जमीन बहुत कमजोर और ढीली है. इसी वजह से इंजीनियरों ने 'डबल-आर्क सिस्मिक आइसोलेशन' (Double-Arch Seismic Isolation) तकनीक का इस्तेमाल किया है. इस तकनीक से टनल जंक्शन 'फ्लोट' यानी लचीले ढांचे की तरह काम करेगा.
टनल की सबसे खास बात यह है कि ये भूकंप-रोधी है. अगर भूकंप आता है, तो सुरंग हल्की सी खिसककर फिर अपनी जगह पर लौट आएगी. इस तरह यह शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करेगी और बड़े नुकसान से बचाएगी.
यह भी पढ़ें- पड़ोसी देर रात तक म्यूजिक बजाता है, तो उसको रोकने का क्या है इलाज, हाई कोर्ट के वकील से जानिए अपने कानूनी अधिकार
टनल के अंदर एक खास मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जा रहा है. अगर दीवार में जरा सा भी बदलाव, यहां तक कि 1 मिलीमीटर की हलचल होती है, तो तुरंत कंट्रोल रूम में अलर्ट पहुंच जाएगा. इससे समय रहते खतरे को पहचाना जा सकेगा.
यात्रियों की सुविधा का ध्यानजब तेज ट्रेन टनल से गुजरती है, तो हवा का दबाव बढ़ जाता है, जिससे कानों में परेशानी हो सकती है. इसे रोकने के लिए एयर कुशन तकनीक लगाई जा रही है. इससे हवा का दबाव कंट्रोल रहेगा और यात्रियों को आराम मिलेगा.
करीब 125 किलोमीटर लंबी यह रेल परियोजना उत्तराखंड के लिए बहुत अहम है. इससे यात्रा का समय कम होगा, पर्यटन बढ़ेगा और व्यापार को भी फायदा मिलेगा. साथ ही आपदा के समय राहत कार्य भी तेजी से किए जा सकेंगे.














