ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो लाने की तैयारी तेज, 3 मेट्रो रूट से बदलेगी नोएडा की कनेक्टिविटी, सर्वे और डीपीआर का काम जारी

Greater Noida Metro: नोएडा वेस्ट में मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए नई डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसके तहत पुराने 11 स्टेशनों के प्रस्ताव को बदलकर अब केवल 5 स्टेशन बनाए जाएंगे.

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ग्रेटर नोएडा मेट्रो
file photo

Greater Noida Metro: नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तीन नए मेट्रो रूट बनाने का काम शुरू होने जा रहे हैं. जमीनी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. ग्रेटर नोएडा वेस्ट में मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए नई डीपीआर (DPR) तैयार की जा रही है, जिसके तहत पुराने 11 स्टेशनों के प्रस्ताव को बदलकर अब केवल 5 स्टेशन बनाए जाएंगे. यह परियोजना नोएडा के सेक्टर-61/51 से शुरू होकर गौर चौक/नॉलेज पार्क-5 तक जाएगी, जिस पर 1,000 करोड़ रुपये की लागत आने की उम्मीद है. इसके अलावा, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में कुल 3 नए रूटों से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बदलने की योजना है, जिसका काम जल्द शुरू होगा.

दरअसल, केंद्र सरकार ने पुरानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर आपत्ति जताते हुए उसे वापस कर दिया, जिसके बाद नोएडा के सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट रूट के लिए भी संशोधित डीपीआर तैयार की जा रही है. जल्द इसको केंद्र सरकार के पास भेज दिया जाएगा. इसके बाद निर्माण की तैयारी भी शुरू हो जाएगी.

ग्रेटर नोएडा वेस्ट तक के लिए मेट्रो की तैयारी

नई DPR और रूट- केंद्र सरकार द्वारा पुरानी डीपीआर रिजेक्ट होने के बाद एनएमआरसी (NMRC) अब एक नई और छोटी डीपीआर तैयार कर रहा है.

5 मुख्य स्टेशन- सेक्टर-51 (नोएडा) से नॉलेज पार्क-V (ग्रेटर नोएडा वेस्ट) तक लगभग 7.5 किमी लंबे इस रूट पर अब केवल 5 स्टेशन प्रस्तावित हैं.

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कनेक्टिविटी- सेक्टर-61 पर दिल्ली मेट्रो की ब्लू लाइन से इंटरचेंज की सुविधा मिलेगी, जो दिल्ली-नोएडा के बीच सफर को आसान बनाएगा.

अन्य रूट- 3 मेट्रो रूटों में सेक्टर-142 से बॉटेनिकल गार्डन कॉरिडोर भी शामिल है.

गाजियाबाद- जेवर लिंक- ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो और गाजियाबाद-जेवर रैपिड रेल कॉरिडोर को एक ही दिशा में होने के कारण समन्वयित किया जा रहा है.

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क्यों करना पड़ा बदलाव?

इस बदलाव की एक बड़ी वजह नमो भारत ट्रेन प्रोजेक्ट भी है. गाजियाबाद से ग्रेटर नोएडा वेस्ट होते हुए जेवर एयरपोर्ट तक नमो भारत चलाने की तैयारी है. एक ही रूट पर दो अलग-अलग मेट्रो या ट्रेन सेवाएं चलाना मुश्किल होता है, इसलिए मेट्रो रूट को छोटा करने का फैसला लिया गया है.

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