Jan Vishwas Bill: जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026 को गुरुवार को राज्यसभा ने पारित कर दिया. इससे पहले यह विधेयक बुधवार को लोकसभा से पास हो चुका था. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कि यह विधेयक भरोसे पर आधारित शासन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लाया गया है. उन्होंने कहा, “जो लोग जानबूझकर कानून तोड़ेंगे, उनके भीतर डर होगा”. इस सुधार के जरिए सरकार ने उचित सिविल व्यवस्था के माध्यम से सुरक्षा देने की कोशिश की है. इस बिल के कानून बन जाने के बाद मौजूदा कानून के कई अपराध, अपराध के दायरे से ही बाहर हो जाएंगे. इसके साथ ही 5 करोड़ से ज्यादा लंबित मामले खत्म हो जाएंगे.
जन विश्वास बिल से 79 कानूनों में बदलाव
यह बिल 23 मंत्रालयों के तहत आने वाले 79 केंद्रीय कानूनों की 784 धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव करता है. इनमें से 717 धाराओं को अपराध मुक्त (डिक्रिमिनलाइज़) करने का लक्ष्य है ताकि ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा मिले, जबकि 67 धाराओं में बदलाव ईज ऑफ लिविंग के लिए किया जाएगा. बिल का मकसद 1000 से ज्यादा अपराधों को सरल बनाना, पुराने और बेकार प्रावधानों को हटाना और पूरे नियामक माहौल को बेहतर करना है. इसके तहत छोटे, तकनीकी या प्रक्रिया से जुड़े उल्लंघनों के लिए जेल की सजा की जगह जुर्माना या प्रशासनिक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है.
संसद में पारित जन विश्वास (संशोधन) बिल, 2026 के तहत, हाईवे जाम, ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यू और बिजली से जुड़े छोटे-मोटे अपराधों के लिए अब जेल की सजा नहीं होगी. 79 कानूनों में 717 छोटे अपराधों को डिक्रिमिनलाइज यानी अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए अब केवल जुर्माना या चेतावनी का प्रावधान किया गया है. यह कदम आम लोगों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' और व्यवसाय के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' बढ़ाने का प्रयास है.
5 करोड़ से अधिक लंबित मामले होंगे खत्मजन विश्वास बिल के के कानून बन जाने के बाद देशभर में 5 करोड़ से ज्यादा लंबित मामलों को खत्म करने में आसानी हो जाएगी. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल बताया कि यह बिल 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है. बता दें कि 2023 में भी इसी पहल के तहत 42 कानूनों के 183 प्रावधानों को डिक्रिमिनलाइज किया गया था. अब सरकार इसे और बड़े स्तर पर लागू कर रही है.
- जेल की सजा के जगह जुर्माना या चेतावनी
- पहली बार गलती करने पर चेतावनी
- अपराध की गंभीरता के अनुसार जुर्माना निर्धारण
- अदालतों में मुकदमों का बोझ कम करना और इंस्पेक्टर राज पर लगाम लगाना
जेल खत्म, जुर्माना शुरू- ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल, ट्रैफिक नियम और छोटे-मोटे सरकारी आदेशों के उल्लंघन में अब सीधे जेल नहीं होगी, बल्कि जुर्माना लगेगा.
बिजली और अन्य क्षेत्र- बिजली अधिनियम के तहत आदेशों के पालन न करने पर जेल की सजा की जगह अब जुर्माना लगेगा.
व्यापक सुधार- 23 मंत्रालयों के अंतर्गत 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में बदलाव किया गया यानी 717 को अपराध मुक्त, 67 को आसान बनाने का काम किया गया है.
दिल्ली नगर निगम (MCD)- सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी या थूकने जैसे मामलों में भी जुर्माना लगेगा, पहले इसमें जेल का प्रावधान भी था.
जन्म-मृत्यु की सूचना न देना- दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना न देना अपराध है और इसके लिए सजा का भी प्रावधान है. जन विश्वास बिल के जरिये इसे भी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है.
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