IIT दिल्ली ने बनाया कमाल का AC मॉड्यूल, बिजली खपत 1200W से घटकर हो जाएगी 800W, एक तिहाई तक कम होगा घर का बिल

IIT दिल्ली के शोधकर्ताओं ने एक नया ऐड‑ऑन मॉड्यूल विकसित किया है जो पारंपरिक AC की बिजली खपत को 1200W से घटाकर 800W कर देता है. यह तकनीक नमी हटाने और कूलिंग को अलग‑अलग प्रक्रिया से संभालती है तथा AC की वेस्ट हीट का पुनः उपयोग करती है, जिससे लगभग 33% ऊर्जा बचत संभव होती है.

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  • IIT दिल्ली की टीम ने एक ऐसा मॉड्यूल बनाया है जो सामान्य एयर कंडीशनर की बिजली खपत को लगभग 30% घटाता है.
  • यह मॉड्यूल हवा से नमी अलग करता है जिससे एयर कंडीशनर को जरूरत से ज्यादा ठंडा करने की जरूरत नहीं पड़ती है.
  • मॉड्यूल में लिक्विड डेसिकेंट और पॉलीमर मेम्ब्रेन का उपयोग होता है जो नमी को सोखकर कमरे की हवा को सुखा देता है.
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नई दिल्ली:

बढ़ती गर्मी और आसमान छूते बिजली बिलों के बीच IIT दिल्ली के रिसर्चर्स ने एयर कंडीशनिंग तकनीक में एक बड़ा वैज्ञानिक ब्रेकथ्रू किया है. संस्थान की मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने एक ऐसा इनोवेटिव ऐड‑ऑन मॉड्यूल विकसित किया है, जिसे किसी भी सामान्य AC से जोड़ने पर उसकी बिजली खपत 1200 वॉट से घटकर करीब 800 वॉट रह जाती है. यानी लगभग 33% तक कम पावर यूज़. वह भी बिना कूलिंग या आराम में कोई कमी किए.

कैसे काम करता है IIT दिल्ली का नया मॉड्यूल?

आज के ज्यादातर AC एक साथ ठंडक और नमी हटाने (dehumidification) का काम करते हैं. हवा से नमी खींचने के लिए इन AC को हवा को जरूरत से ज्यादा ठंडा करना पड़ता है. यही प्रक्रिया सबसे ज्यादा बिजली खाती है. IIT दिल्ली के प्रोफेसर अनुराग गोयल की टीम ने एक ऐसा मॉड्यूल बनाया है जो नमी को AC से अलग हटाता है, ताकि AC को हवा को जरूरत से ज्यादा ठंडा न करना पड़े.

इस सिस्टम की खास बातें 

इसमें लिक्विड डेसिकेंट (साल्ट सॉल्यूशन) हवा से सीधे नमी सोख लेता है. एक पतली पॉलीमर मेम्ब्रेन हवा और साल्ट सॉल्यूशन के बीच रहती है, जिससे नमक के कण कमरे की हवा में नहीं जाते. इस तरीके से नमी हटाने के बाद AC पर अतिरिक्त लोड नहीं पड़ता और कंप्रेसर कम बिजली खाता है.

वेस्ट हीट का शानदार इस्तेमाल 

जब साल्ट सॉल्यूशन नमी सोख लेता है तो उसे दोबारा इस्तेमाल करने के लिए 'रीजनरेट' यानी सुखाना पड़ता है. जहां पारंपरिक सिस्टम में इसके लिए हीटर चाहिए होता है, वहीं IIT दिल्ली की टीम ने एक समाधान निकाला है.  AC के आउटडोर यूनिट से निकलने वाली वेस्ट हीट को ही इस सॉल्यूशन को सुखाने में इस्तेमाल किया जाता है.

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माने, न हीटिंग कॉइल, न इलेक्ट्रिक हीटर. AC की ही बेकार जाती गर्मी फिर से काम में आती है।.यह डिजाइन भारत के अलग‑अलग मौसमों में ऊर्जा को संतुलित रखते हुए काम करता है.

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कितनी बिजली बचेगी?

प्रोफेसर अनुराग गोयल के मुताबिक एक सामान्य AC लगभग 1200W बिजली खर्च करता है. IIT दिल्ली के इस हाइब्रिड मॉडल से सिर्फ करीब 800W बिजली खर्च होगी. यानी लगभग 33% कम बिजली लगेगी. बहुत नम इलाकों में लगभग 28%, और सूखे इलाकों में 41.5% तक बचत की संभावना जताई गई है. इस तरह की बचत गर्मियों में देश की बिजली मांग को काफी हद तक कम कर सकती है.

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वैज्ञानिक मान्यता भी मिल चुकी

इस शोध को Journal of Building Engineering में 'Model-based analysis of a novel hybrid membrane-liquid desiccant air conditioner for high-efficiency space cooling' शीर्षक से प्रकाशित किया गया है.

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भारत के लिए क्यों गेम‑चेंजर है यह तकनीक?

अगर यह टेक्नोलॉजी बड़े पैमाने पर अपनाई गई, तो घरों और ऑफिसों के बिजली बिल में भारी कमी दर्ज होगी. राष्ट्रीय पावर ग्रिड पर कम दबाव पड़ेगा. ऊर्जा की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी देखी जाएगी. स्मार्ट और सस्टेनेबल कूलिंग सॉल्यूशन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.  IIT दिल्ली की टीम का मानना है कि यह तकनीक आने वाले वर्षों में भारतीय घरों और व्यावसायिक भवनों में बड़े पैमाने पर अपनाई जा सकती है.

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