How to Identify Fake Trading Apps: आजकल के डिजिटल दौर में निवेश करना बहुत ही ज्यादा आसान हो गया है. ऐसे में साइबर ठगों ने भी अपना जाल बिछा लिया है जिसमें काफी सारे लोग फंस जाते हैं और लाखों-करोड़ों का नुकसान हो जाता है. ये स्कैमर्स शेयर मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर फेक ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए मासूम लोगों को निशाना बनाते हैं, जहां लोग अपनी कमाई गंवा देते हैं. ये ऐप्स एकदम असली दिखते हैं जिस कारण लोग फर्जी ऐप्स की पहचान नहीं कर पाते हैं. इसी कड़ी में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (14C) ने X पर वीडियो शेयर किया है और बताया है कि लोग फेक ट्रेडिंग ऐप्स की पहचान कैसे कर सकते हैं. आइए जानते हैं...
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कैसे होता है स्कैम?
फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स बिल्कुल असली प्लेटफॉर्म की तरह ही दिखाई देते हैं. जानकारी के अभाव में लोग इन ऐप्स को यूजर्स डाउनलोड करते हैं और इन्वेस्ट करना शुरू कर देते हैं. फर्जी होने के कारण ये पैसा मार्केट में इनवेस्ट नहीं होता है और सीधे स्कैमर्स की जेब में पहुंच जाता है. इसके कारण कई लोग अपनी लाखों-करोड़ों की कमाई गंवा बैठते हैं.
SEBI ने शुरू किया 'Verified' लेबल
धोखाधड़ी के खतरे को कम करने के लिए SEBI द्वारा वेरिफाइड ट्रेडिंग ऐप्स की पहचान के लिए 'वेरिफाइड' लेबल की व्यवस्था शुरू की गई है. इससे असली और फेक ऐप्स के बीच अंतर करना आसान हो जाएगा. आसान भाषा में समझाया जाए तो भारत में अब जो भी SEBI रजिस्टर्ड स्टॉक ट्रेडिंग ऐप्स हैं उनपर गूगल प्ले स्टोर पर एक खास वेरिफाइड का लेबल रहेगा. इससे पता लगाना आसान हो जाएगा कि ऐप SEBI रजिस्टर्ड है. फिलहाल यह फीचर स्टॉक ट्रेडिंग ऐप के लिए ही है. भविष्य में यह अन्य फाइनेंशियल ऐप्स के लिए भी आएगा.
इन बातों का भी ध्यान रखें यूजर्स
- यूजर्स कहीं इनवेस्ट करने से पहले बैंक डिटेल्स को SEBI टूल्स से चेक करें.
- UPI ID हैंडल में वैलिड जरूर लिखा होना चाहिए. इसे SEBI चेक फीचर सारथी ऐप से वेरिफाई किया जा सकता है.
- कहीं भी इनवेस्ट करने से पहले ऐप पर वेरिफाइड लेबल जरूर चेक करें.
इसके अलावा अगर आप किसी फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं तो तुरंत 1930 पर call करें या http://cybercrime.gov.in पर report करें.














