Higher Pension Rule: पेंशन को लेकर लंबे समय से उलझन में चल रहे लाखों कर्मचारियों के लिए झारखंड हाई कोर्ट ने राहत भरा फैसला लिया है. कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर किसी कर्मचारी ने ज्यादा पेंशन के लिए ऑप्शन (Higher Pension option) नहीं भी चुना था तब भी उसे ज्यादा फायदेमंद पेंशन योजना का लाभ दिया जा सकता है. यह फैसला खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए अहम है जो पहले CPF (Contributory Provident Fund) में थे और बाद में GPF(General Provident Fund) पेंशन योजना ज्यादा फायदेमंद साबित हुई.
बिना ऑप्शन के भी मिलेगा ज्यादा पेंशन का फायदा
झारखंड हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगर कोई कर्मचारी तय समय पर यह नहीं बताता कि वह कंट्रीब्यूटरी प्रोविडेंट फंड में बने रहना चाहता है तो उसे अपने आप ज्यादा फायदेमंद जनरल प्रोविडेंट फंड योजना में माना जाएगा. कोर्ट का मानना है कि पेंशन जैसी सुविधा कर्मचारियों के भले के लिए होती है और इसमें किसी तरह की सख्ती या भेदभाव नहीं होना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला केंद्रीय विद्यालय संगठन के एक रिटायर्ड शिक्षक से जुड़ा है. शिक्षक की नौकरी अप्रैल 1995 में पक्की हुई थी और वह मार्च 2019 में रिटायर हुए. उन्होंने पहले सीपीएफ चुना था लेकिन बाद में नियम बदलने के बाद भी उनसे दोबारा कोई ऑप्शन नहीं लिया गया. जब उन्होंने पेंशन स्कीम बदलने की मांग की तो उसे नजरअंदाज कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने आरटीआई लगाई और फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
सरकारी रिकॉर्ड में नहीं मिला कोई ऑप्शन फॉर्म
आरटीआई के जवाब में यह सामने आया कि कर्मचारी के रिकॉर्ड में ऐसा कोई फॉर्म नहीं है जिसमें उन्होंने सीपीएफ में बने रहने की इच्छा जताई हो. इसी आधार पर उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक, उन्हें जीपीएफ पेंशन योजना में शामिल माना जाना चाहिए था. हाई कोर्ट ने इस दलील को सही माना.
हाई कोर्ट ने क्यों माना पेंशन स्कीम बदलना सही
हाई कोर्ट ने कहा कि अगर कोई योजना कर्मचारी के लिए ज्यादा फायदेमंद है तो उसे अपनाने से रोकना गलत होगा. कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ इसलिए किसी को बेहतर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसने समय पर ऑप्शन नहीं चुना. ऐसा करना भेदभाव होगा.
सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी सहारा
झारखंड हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के 2022 के एक पुराने फैसले का भी जिक्र किया. उस फैसले में कहा गया था कि पेंशन योजना में देरी से बदलाव करने पर भी रोक नहीं लगाई जा सकती. पेंशन को कर्मचारी का हक माना गया है न कि कोई दया या मेहरबानी.
इन तीन हालात में पेंशन बदलना मान्य
कोर्ट ने साफ किया कि तीन स्थितियों में पेंशन योजना बदली जा सकती है.
- पहली जब कर्मचारी ने कोई ऑप्शन ही नहीं दिया.
- दूसरी जब तय समय पर ऑप्शन नहीं दिया.
- तीसरी जब पहले सीपीएफ चुना लेकिन बाद में ज्यादा फायदेमंद पेंशन योजना की मांग की.
इन तीनों ही मामलों में कर्मचारी को पेंशन योजना बदलने का अधिकार होगा.
सरकारी विभागों की याचिका खारिज
इस मामले में केंद्रीय विद्यालय संगठन ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल का फैसला सही है और इसमें दखल देने की जरूरत नहीं है.
कर्मचारियों के लिए अहम फैसला
यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए बेहद अहम है जो सीपीएफ और पेंशन योजना को लेकर उलझन में हैं. अब साफ हो गया है कि अगर पेंशन योजना ज्यादा फायदेमंद है तो बिना ऑप्शन के भी उसका लाभ मिल सकता है. इससे रिटायर्ड और रिटायर होने वाले कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही परेशानी खत्म हो सकती है.














