Rent Agreement: 90% सस्ता हुआ रेंट एग्रीमेंट बनवाना! यूपी सरकार का बड़ा फैसला, अब महज इतने रुपये में होगा रजिस्ट्रेशन

सरकार का मानना है कि किराये के बाजार में पारदर्शिता बढ़ने से प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्‍टर और किरायेदारी की व्यवस्था और मजबूत होगी, जिससे भविष्य में होने वाली कानूनी समस्याओं में भी कमी आएगी. 

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Rent Agreement in Uttar Pradesh: एनसीआर के नोएडा, गाजियाबाद में जॉब करने वाले उन लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है, जो किराये पर मकान लेकर रहते हैं. रेंट एग्रीमेंट पर अब उनकी मोटी बचत होगी. इसे ऐसे समझिए कि किरायेदारों को पहले जहां 10,000 रुपये लगते थे, वहां अब महज 1,000 रुपये लगेंगे. दरअसल, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मकान मालिकों और किरायेदारों को बड़ी राहत देते हुए किरायेदारी से जुड़े नियमों (Tenancy Rules) में बड़ा बदलाव किया है. सरकार ने रेंट एग्रीमेंट के रजिस्‍ट्रेशन पर लगने वाले स्‍टांप शुल्‍क और रजिस्‍ट्रेशन चार्ज को 90 फीसदी तक सस्‍ता कर दिया है. बदलाव के इस फैसले के बाद अब रेंट एग्रीमेंट बनाने की प्रक्रिया बेहद सस्‍ती हो गई है.  

यूपी सरकार ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है और रजिस्‍ट्री विभागों से इसे अविलंब लागू करने को कहा है. अब वैसे किरायेदार जो मोटे खर्च के चलते रेंट एग्रीमेंट बनाने से बचते थे और इसके चलते अपने अधिकारों से भी वंचित रह जाते थे, उन्‍हें रेंट एग्रीमेंट बनाना बहुत सस्‍ता पड़ेगा. 

आपके कितने पैसे बचेंगे? 

यूपी सरकार ने 2 से 6 लाख रुपये और 6 से 10 लाख रुपये तक के वार्षिक किराए वाली संपत्तियों के लिए भी स्टांप शुल्क को पुराने शुल्क का सिर्फ 10% निर्धारित किया है. नीचे चार्ट में देखें, सालाना 2 लाख यानी करीब 16,500 रुपये/महीने तक के किराये पर लिए गए मकानों का रेंट एग्रीमेंट बनवाने पर आपके कितने पैसे बचेंगे. 

किराये की अवधिपुराना शुल्कनया शुल्क
1 साल तक₹10,000₹1,000
5 साल तक₹30,000₹3,000
10 साल तक₹40,000₹4,000
(कैलकुलेशन सालाना ₹2 लाख तक के किराया पर)

अधिकारियों का कहना है कि ये फैसला, किरायेदारी अनुबंधों के पंजीकरण को बढ़ावा देगा. पहले भारी शुल्क के कारण लोग रजिस्ट्रेशन कराने से बचते थे, लेकिन अब यह स्थिति बदल जाएगी.

किस तरह फायदा पहुंचाएगा ये फैसला?

बताया जा रहा है कि इस फैसले का सीधा असर किरायेदारी सिस्टम पर पड़ेगा, जिससे ये और ज्‍यादा पारदर्शी और सुलभ बनेगा. 

  1. कम होंगे विवाद: रजिस्‍टर्ड रेंट एग्रीमेंट कानूनी रूप से मजबूत होता है. अब मकान मालिक और किरायेदार आसानी से एग्रीमेंट बनवा सकेंगे, जिससे दोनों पक्षों के बीच होने वाले विवाद कम होंगे और उनके अधिकार स्पष्ट रहेंगे. 
  2. कानूनी सुरक्षा: किरायेदारों की सुरक्षा बढ़ेगी और मकान मालिकों को भी अपने अधिकार सुरक्षित रखने में आसानी होगी. बिना रेंट एग्रीमेंट के समझौते कराने वाले एजेंटों पर भी रोक लगेगी. 
  3. सरकारी आय बढ़ेगी: निबंधन विभाग का मानना है कि शुल्क कम होने के बाद रेंट एग्रीमेंट बनवाने वाले लोगों की संख्‍या 10 गुना से ज्‍यादा बढ़ सकती है. इससे पारदर्शिता तो बढ़ेगी ही, विभाग की आय भी बढ़ेगी. 

यूपी सरकार का मानना है कि किराये के बाजार में पारदर्शिता बढ़ने से प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्‍टर और किरायेदारी की व्यवस्था और मजबूत होगी, जिससे भविष्य में होने वाली कानूनी समस्याओं में भी कमी आएगी. 

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