Smart Meter Working Mechanism and Technology : हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को खत्म करने का फैसला लिया है. अब जिन घरों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगे हैं, वे पोस्टपेड सिस्टम की तरह काम करेंगे. पिछले काफी समय से स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों के बीच नाराजगी देखी जा रही थी. उपभोक्ताओं का आरोप था कि स्मार्ट मीटर सामान्य बिजली मीटर की तुलना में तेज चलते हैं, जिससे बिजली बिल ज्यादा आता है. शिकायतों को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है. लेकिन अब सवाल यही है कि क्या सच में ऐसा है?
क्या स्मार्ट मीटर सच में तेज चलते हैं?
स्मार्ट मीटर को लेकर सबसे बड़ी शिकायत यही रही कि वे सामान्य मीटर की तुलना में ज्यादा तेजी से यूनिट रिकॉर्ड करते हैं. हालांकि, बिजली विभाग ने इन दावों को गलत बताया है. विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर भी सामान्य मीटर की तरह ही बिजली खपत को रिकॉर्ड करते हैं. इनमें किसी तरह की एक्स्ट्रा या गलत रीडिंग दर्ज नहीं होती.
अधिकारियों के मुताबिक, स्मार्ट मीटर में सिम कार्ड लगा होता है, जो सीधे सिस्टम को डेटा भेजता है. इससे मैनुअल रीडिंग में होने वाली गलतियों या ह्यूमन एरर की संभावना खत्म हो जाती है. विभाग ने यह भी दावा किया कि कई मीटरों की टेस्टिंग की गई है. इनमें स्मार्ट मीटर की रीडिंग सामान्य मीटर के बराबर पाई गई है.
किस टेक्नोलॉजी पर काम करते हैं स्मार्ट मीटर?
स्मार्ट मीटर आधुनिक और एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस हैं. ये रियल टाइम में बिजली खपत को रिकॉर्ड करते हैं और इसकी जानकारी सीधे उपभोक्ता तथा बिजली विभाग तक पहुंचाते हैं. ये मीटर रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) या सेलुलर नेटवर्क की मदद से डेटा ट्रांसफर करते हैं. स्मार्ट मीटर हर 15 मिनट या एक घंटे में बिजली का डेटा रिकॉर्ड कर सकते हैं. उपभोक्ता मोबाइल ऐप के जरिए भी यह देख सकते हैं कि उनके घर में कितनी बिजली खर्च हो रही है. इसके अलावा स्मार्ट मीटर बिजली चोरी रोकने और सही बिलिंग सुनिश्चित करने में भी मददगार माने जाते हैं.














