Delhi Mumbai Expressway to Noida Airport : नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कमर्शियल फ्लाइट्स की शुरुआत 15 जून से होने जा रही है. इसके मद्देनजर एयरपोर्ट की मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है. इसी कड़ी में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को सीधे एयरपोर्ट से जोड़ने वाले इंटरचेंज को तैयार किया जा रहा है, जो यात्रा को बेहद आसान बना देगा. यह इंटरचेंज फरीदाबाद से आने वाले 31 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ा है. इससे एयरपोर्ट तक पहुंचना और काफी आसान हो जाएगा.
फरीदाबाद से तैयार हो रहा 31 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) फरीदाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए 31 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे तैयार कर रहा है. इसका ज्यादातर निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश क्षेत्र में पूरा हो चुका है. यह एक्सप्रेसवे यमुना एक्सप्रेसवे के 32 किलोमीटर पॉइंट पर आकर मिलता है और वहां से सीधे एयरपोर्ट के मेन गेट तक पहुंचता है. इसके जरिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक मजबूत कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार किया जा रहा है.
इंटरचेंज को दिया जा रहा सुंदर और आधुनिक रूप
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लगभग 900 मीटर पहले बने इस इंटरचेंज को केवल एक ट्रैफिक पॉइंट नहीं बल्कि एक आकर्षक लैंडमार्क के तौर पर तैयार किया जा रहा है. एनएचएआई यहां क्लोवर लीफ डिजाइन के चारों हिस्सों को बेहद सुंदर तरीके से सजा रहा है. इंटरचेंज के हर हिस्से में लगभग 500 मीटर खाली जमीन पर हरियाली और सजावट का काम किया जा रहा है. सड़क किनारे देशी और विदेशी पौधों के साथ फूलदार झाड़ियां लगाई जा रही हैं, ताकि यह क्षेत्र पूरे साल हरा-भरा और आकर्षक बना रहे.
मूर्तियों और हरियाली से सजेगा पूरा क्षेत्र
इंटरचेंज के चारों क्लोवर लीफ में भारत के सांस्कृतिक और प्राकृतिक प्रतीकों को दर्शाने वाली मूर्तियां लगाई जा रही हैं. इनमें राष्ट्रीय पक्षी मोर, उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी सारस क्रौंच, गौतम बुद्ध की प्रतिमा और जिराफ जैसी आकर्षक मूर्तियां शामिल हैं. इसके साथ ही चारों ओर फूलदार पौधों और हरियाली का खास प्रबंध किया जा रहा है, जिससे यह क्षेत्र एक सुंदर और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल के रूप में उभर सके.
जल संरक्षण पर भी खास ध्यान
इंटरचेंज के निर्माण में पर्यावरण का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है. यहां रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जा रही है, ताकि बारिश का पानी व्यर्थ न जाए और ग्राउंड वॉटर लेवल को रिचार्ज करने में मदद मिले. हर क्लोवर लीफ में अलग-अलग हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिससे सड़क और आसपास के क्षेत्रों का पानी स्टोर कर जमीन में वापस भेजा जा सके.
एयरपोर्ट कनेक्टिविटी का नया मॉडल
इन प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सबसे बेहतर कनेक्टेड एयरपोर्ट्स में शामिल हो जाएगा. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी यात्रियों के समय और सुविधा दोनों को बढ़ाएगी.














