ईरान-इजरायल युद्ध के कारण पैदा हुए LPG संकट से अछूता बिहार का एक गांव

LPG Crisis: जहां देश के कई हिस्सों में LPG गैस की किल्लत की खबरें आ रही हैं, वहीं यह गांव इस संकट से पूरी तरह अछूता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां लगाया गया बायोगैस प्लांट. आइए जानते हैं इस बारे में-

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
LPG संकट से अछूता बिहार का एक गांव

बिहार के अररिया जिले के रानीगंज विधानसभा क्षेत्र का इंद्रपुर गांव इन दिनों एक खास वजह से चर्चा में है. जहां देश के कई हिस्सों में LPG गैस की किल्लत की खबरें आ रही हैं, वहीं यह गांव इस संकट से पूरी तरह अछूता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां लगाया गया बायोगैस प्लांट, जो ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

करीब 6 महीने पहले गांव में बायोगैस प्लांट स्थापित किया गया था. इस प्लांट से पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों तक गैस पहुंचाई जाती है. इससे ग्रामीणों को न तो गैस सिलेंडर के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है और न ही कालाबाजारी का सामना करना पड़ता है. गांव के लोग अब आराम से दिन में दो बार खाना बना पा रहे हैं.

यह भी पढ़ें- ATM से मिल रही LPG, जानिए ये कैसे करता है काम

धुआं मुक्त हुआ गांव

पहले यहां के लोग लकड़ी और उपलों से खाना बनाते थे, जिससे धुआं होता था और स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता था. लेकिन अब बायोगैस के इस्तेमाल से गांव धुआं मुक्त हो रहा है. इससे न केवल लोगों का जीवन आसान हुआ है, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा मिल रहा है. इस प्लांट की खास बात यह है कि इसमें गांव के पशुओं से मिलने वाले गोबर का इस्तेमाल किया जाता है. किसान रोजाना 40 से 45 किलो गोबर टैंक में डालते हैं, जिससे गैस बनती है. यह गैस एक स्टोरेज सिस्टम में जमा होती है और फिर पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंचाई जाती है. एक 2 घन मीटर का बायोगैस प्लांट हर महीने करीब डेढ़ से दो LPG सिलेंडर के बराबर गैस तैयार कर सकता है.

कितना आता है खर्च?

रानीगंज के कृषि समन्वयक बलराम कुमार के अनुसार, इस योजना के लिए किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया था. सत्यापन के बाद प्लांट लगाने की अनुमति दी गई. इस प्लांट को लगाने में लगभग 42 से 45 हजार रुपये खर्च आता है, जिसमें सरकार की ओर से करीब 21 हजार रुपये तक की सब्सिडी भी दी जाती है.

Advertisement

आज इंद्रपुर गांव के 30 से 40 परिवार इस बायोगैस का लाभ उठा रहे हैं. इससे उनका खर्च कम हुआ है और खेती के लिए भी जैविक खाद मिल रही है. ग्रामीणों का कहना है कि युद्ध के कारण गैस की किल्लत की खबरें मिल रही हैं, लेकिन गांव में इसका कोई असर नहीं है. यहां दो वक्त, सुबह 6 से 9 बजे और शाम में 4 से 7 बजे तक गैस की आपूर्ति की जाती है. गैस शुद्ध और तेज रहे इसके लिए बैलून और किट लगाया गया है, जिसमें गैस स्टोर होता है फिर आपूर्ति की जाती है.

इंद्रपुर गांव एक उदाहरण है कि सही तकनीक और जागरूकता से गांव आत्मनिर्भर बन सकते हैं. बायोगैस न सिर्फ सस्ती और सुविधाजनक है, बल्कि यह एक स्वच्छ और टिकाऊ समाधान भी है.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Iran Israel War: शांति वार्ता से नहीं निकला समाधान, अमेरिका-ईरान फिर भिड़ेंगे? | Donald Trump
Topics mentioned in this article