Ayushman Bharat Yojana: केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस हेल्थ कवर मिलता है. केंद्र सरकार ने इस योजना को 2018 में शुरू किया था. इस योजना के तहत लाखों लोगों मुफ्त में इलाज की सुविधा मिली है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अब कई बड़े प्राइवेट अस्पताल इस सरकारी योजना से बाहर निकलने की तैयारी कर रहे हैं.
ईटी में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इसकी वजह कम इलाज दर, भुगतान में देरी और सरकार द्वारा तय कीमतों की सीमा हो सकती है. हालांकि, अभी तक किसी भी बड़े अस्पताल ने खुले तौर पर यह नहीं कहा है कि वे सरकारी योजनाओं से बाहर हो रहे हैं, लेकिन मैक्स हेल्थकेयर, नारायणा हेल्थ, फोर्टिस हेल्थकेयर और हेल्थकेयर ग्लोबल जैसी कंपनियों ने माना है कि इन योजनाओं को चलाने में उन्हें नुकसान और दिक्कतें आ रही हैं. आमतौर पर CGHS (केंद्रीय कर्मचारियों की स्वास्थ्य योजना) और ECHS (पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य योजना) जैसी सरकारी योजनाएं निजी अस्पतालों की कुल कमाई का लगभग 25% हिस्सा होती हैं, लेकिन कंसल्टिंग फर्म Praxis Global Alliance के अनुसार, आने वाले समय में यह हिस्सा 3 से 5 प्रतिशत तक घट सकता है. इसके लिए अस्पताल कुछ योजनाओं से बाहर निकल सकते हैं या इन मरीजों के लिए बेड की संख्या सीमित कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें:- एयरपोर्ट जाने वालों के लिए जरूरी खबर: IGI के आसपास इन गलतियों पर लगेगा भारी जुर्माना, पहले ही जान लें जरूरी बात
दरअसल, CGHS योजना केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारकों के लिए है, जबकि ECHS सेना के जवानों और उनके परिवारों के लिए. इन दोनों योजनाओं में इलाज की दरें सरकार तय करती है, जो अस्पतालों को कम मुनाफे वाली लग रही हैं. अपोलो हॉस्पिटल्स ने इन योजनाओं पर खुलकर कुछ नहीं कहा है, क्योंकि उनका इससे जुड़ा कारोबार कम है. कंपनी के मुताबिक, FY26 की तीसरी तिमाही में उनकी 83% कमाई बीमा और नकद भुगतान वाले मरीजों से आई यानी सरकारी योजनाओं से होने वाली कमाई बहुत कम रही.
- इलाज के लिए कम पैसे मिलना
- सरकार की ओर से भुगतान देर से होना
रिपोर्ट में बताया गया कि प्राइवेट हॉस्पिटल अब अपनी कमाई का संतुलन बदलने की कोशिश कर रहे हैं. वे ऐसे मरीजों और भुगतान करने वालों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनसे पैसे जल्दी मिल जाते हैं, ताकि अस्पतालों की नकदी स्थिति यानी वर्किंग कैपिटल बेहतर बनी रहे. मैक्स हेल्थकेयर ने पहली बार साफ‑साफ बताया है कि सरकारी योजना CGHS से उन्हें कितना नुकसान हो रहा है. कंपनी के मुताबिक, CGHS से जुड़ने के कारण उन्हें करीब 200 करोड़ रुपये के राजस्व पर असर पड़ा है. CGHS के साथ हुए समझौते के तहत मैक्स को कीमोथेरेपी दवाओं पर 30% तक की छूट देनी होती है. जिन दवाओं में 30% से कम मुनाफा था, उनकी सप्लाई बंद कर दी गई. जिन दवाओं में मुनाफा 30% से ज्यादा था, वे अब भी दी जा रही हैं.














