Bihar News: बिहार में LPG की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने के कारण आम लोगों को खाना बनाने में दिक्कत हो रही थी. ऐसे में सरकार ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में राशन की दुकानों पर कोयला उपलब्ध कराने का फैसला लिया है. इस फैसले का मकसद है कि किसी भी परिवार को खाना पकाने में परेशानी न हो.
हर परिवार को मिलेगा 100 किलो कोयला
सरकार के इस फैसले के तहत जिन परिवारों के पास राशन कार्ड है, उन्हें हर महीने लगभग 100 किलो यानी एक क्विंटल कोयला दिया जाएगा. यह सुविधा फिलहाल सिर्फ उन लोगों के लिए है जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (NFSA) के तहत आते हैं. इसका मतलब है कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गैस की कमी के बावजूद खाना बनाने के लिए एक वैकल्पिक ईंधन मिल जाएगा. हालांकि, जिन लोगों के पास राशन कार्ड नहीं है, उनके लिए अभी कोई अलग योजना घोषित नहीं की गई है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने कोयले की सप्लाई के लिए पूरी योजना तैयार कर ली है.
- सबसे पहले कोयला कोल कंपनियों से खरीदा जाएगा, जिसमें कोल इंडिया की अहम भूमिका होगी.
- इसके बाद कोयला थोक विक्रेताओं (wholesalers) के पास भेजा जाएगा.
- वहां से कोयला जिलों में पहुंचेगा.
- अंत में जन वितरण प्रणाली (PDS)के जरिए राशन दुकानों तक भेजा जाएगा.
- यानी जिस तरह आप राशन लेते हैं, उसी तरह अब कोयला भी मिल सकेगा.
कोयले के वितरण और उसकी लागत को लेकर भी सरकार ने योजना बनाई है. इसके तहत थोक विक्रेताओं को एक तय शुल्क दिया जाएगा. हर जिले में एक टीम बनाई जाएगी. यह टीम तय करेगी कि कोयला किस कीमत पर लोगों को दिया जाए, साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कहीं गड़बड़ी या कालाबाजारी न हो.
यह फैसला उन लाखों परिवारों के लिए राहत लेकर आ सकता है जो गैस की कमी से जूझ रहे हैं. खासकर ग्रामीण और गरीब परिवारों को इससे तुरंत फायदा मिलेगा. हालांकि, कोयले के इस्तेमाल से प्रदूषण बढ़ने का खतरा भी है. इसलिए पर्यावरण को लेकर चिंता जताई जा रही है. लेकिन फिलहाल सरकार का फोकस इस बात पर है कि संकट के समय में लोगों की बुनियादी जरूरत प्रभावित न हो.














