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KBC 18: एक करोड़ के सवाल पर अटके CRPF अफसर मनोज यादव, क्या आप जानते हैं किसके नाम पर पड़ा है गोल्डन गेट ब्रिज का नाम?

KBC 18 में CRPF डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार यादव ने 50 लाख रुपये जीते. 1 करोड़ के सवाल का जवाब नहीं पता होने पर उन्होंने खेल छोड़ दिया. इससे पहले उन्होंने झारखंड में मुठभेड़ के दौरान जान बचने का किस्सा भी सुनाया.

KBC 18: एक करोड़ के सवाल पर अटके CRPF अफसर मनोज यादव, क्या आप जानते हैं किसके नाम पर पड़ा है गोल्डन गेट ब्रिज का नाम?
एक करोड़ के सवाल पर अटके मनोज यादव

‘कौन बनेगा करोड़पति 18' में बुधवार से शुरू हुआ CRPF डिप्टी कमांडेंट मनोज कुमार यादव का सफर गुरुवार के एपिसोड में भी जारी रहा. अमिताभ बच्चन के सामने हॉट सीट पर बैठे मनोज ने अपनी जिंदगी से जुड़े कई किस्से सुनाए. उन्होंने बताया कि देश की सेवा के दौरान उन्हें कई मुश्किल हालात का सामना करना पड़ा. शो में उन्होंने 14 सवालों के सही जवाब देकर 50 लाख रुपये जीत लिए. इसके बाद उनके सामने 1 करोड़ रुपये का सवाल आया, लेकिन जवाब को लेकर भरोसा नहीं होने पर उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला किया.

1 करोड़ के सवाल पर लिया समझदारी भरा फैसला

मनोज के सामने सवाल था- किस खोजकर्ता और अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को उस जलडमरूमध्य का नाम रखने का श्रेय दिया जाता है, जिसके नाम पर गोल्डन गेट ब्रिज का नाम पड़ा? इसके विकल्प थे- जेम्स ब्लेन, जॉन फ्रेमोंट, विनफील्ड स्कॉट और लेलैंड स्टैनफोर्ड. मनोज को सही जवाब नहीं पता था. उन्होंने 50 लाख रुपये लेकर खेल छोड़ दिया. इसके बाद जब उनसे सही जवाब का अनुमान लगाने को कहा गया, तो उन्होंने विनफील्ड स्कॉट चुना, जो गलत था. सही जवाब जॉन फ्रेमोंट था.

जॉन फ्रेमोंट ने कैसे रखा था गोल्डन गेट नाम?

जॉन सी. फ्रेमोंट 1856 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार थे. वह चुनाव हार गए थे और जेम्स बुकानन अमेरिका के 15वें राष्ट्रपति बने थे. बताया जाता है कि 1846 में फ्रेमोंट ने सैन फ्रांसिस्को के जलडमरूमध्य का नाम ‘गोल्डन गेट' रखा था. उन्होंने इसे इस्तांबुल के गोल्डन हॉर्न बंदरगाह जैसा बताया था. इसी जगह पर बना गोल्डन गेट ब्रिज 1937 में पूरा हुआ था.

झारखंड में मुठभेड़ के दौरान बाल-बाल बचे थे मनोज

मनोज ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के रहने वाले हैं और फिलहाल गुरुग्राम में CRPF इंटेलिजेंस स्कूल में तैनात हैं. वह श्रीनगर की 79वीं बटालियन, झारखंड में CoBRA, अहमदाबाद की 100वीं RAF और झारखंड की 157वीं बटालियन में सेवा दे चुके हैं. उन्होंने बताया कि CoBRA की ट्रेनिंग में जवानों को जंगल में मुश्किल हालात में खुद को बचाने के लिए तैयार किया जाता है. कभी-कभी उन्हें बिना भोजन और पानी के भी जीवित रहने की चुनौती दी जाती है. मनोज ने यह भी बताया कि ऐसी ट्रेनिंग में सांप खाने जैसी परिस्थितियों के लिए भी तैयार किया जाता है.

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झारखंड में एक मुठभेड़ के दौरान मनोज की दाईं आंख में छर्रा लग गया था. चोट रेटिना तक पहुंच गई थी और उनकी आंख जाने का खतरा था. उन्होंने कहा कि यह घटना उनके लिए जानलेवा हो सकती थी, लेकिन वह देश की सेवा करने को लेकर हमेशा गर्व महसूस करते हैं.
 

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