मैरी नायडू का हौसला तमाम कठिनाइयों के बावजूद बरकरार
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- झुग्गी में रहती है और फुटपाथ पर प्रैक्टिस करती है मैरी नायडू
- मिशन 11 मिलियन प्रोग्राम के तहत सम्मानित 11 खिलाड़ियों में मैरी भी
- मैरी का सपना फुटबॉल की टीम इंडिया का हिस्सा बनने का है
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मुंबई:
देश में खेल को बढ़ावा देने की घोषणाएं तो बहुत होती हैं, बड़े-बड़े आयोजन भी किए जाते हैं, बावजूद इसके सरकार न तो खेल की और न ही खिलाड़ियों की सुध लेती है. सरकारी उदासीनता की शिकार ऐसी ही एक स्कूली फुटबॉल खिलाड़ी मैरी नायडू ग्राउंड ही नहीं, घर जैसी बुनियादी सुविधा से भी वंचित है. लेकिन बड़ी बात है कि उसका जोश और जज्बा किसी तरह से कम नहीं हुआ है. लिहाजा वह फुटपाथ पर ही फुटबॉल का अभ्यास करती रहती है. मैरी का सपना फुटबॉल की टीम इंडिया का हिस्सा बनने का है. मुंबई के किंग सर्कल में झुग्गी बस्ती में रहने वाली मैरी नायडू देशभर से चुनी गईं उन 11 फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक है, जो केंद्र सरकार के 'मिशन 11 मिलियन प्रोग्राम' का हिस्सा रही है. मैरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित भी कर चुके हैं, लेकिन मैरी के पास अपना एक पक्का घर तो दूर खेलने के लिए मैदान भी मयस्सर नहीं है. मजबूरन झोपड़ियों के बीच फुटपाथ पर ही फुटबॉल की प्रैक्टिस करने को मजबूर है.
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16 साल की मैरी नायडू 10वीं की छात्रा है. भारतीय इंदिरा नगर में प्लास्टिक से बनी झोपड़ी में रहती है. मैरी ने बताया कि पहले उसका घर पक्का हुआ करता था, लेकिन साल 2010 में बीएमसी ने उसे तोड़ दिया, तब से कच्चा झोपड़ा ही उसका आशियाना है, क्योंकि बीएमसी कभी भी तोड़ने आ धमकती है. मेरी ने आरोप लगाया कि बीएमसी वाले उसके सर्टिफिकेट और किताबें भी उठा ले जाते हैं, जिसकी वजह से पढाई में भी बाधा उत्पन्न होती है.
VIDEO : फुटपाथ पर फुटबॉल प्रैक्टिस
बीएमसी में क्लीनअप मार्शल मैरी के पिता प्रकश नायडू का भी सपना है कि उनकी बेटी टीम इंडिया का हिस्सा बने, लेकिन बिना सरकारी मदद के यह संभव नहीं है. सरकार से मदद तो अभी तक नहीं मिली है, लेकिन मैरी का जज्बा देख इलाके के एक सामाजिक कार्यकर्ता कैचरु यादव ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है. यादव ने मैरी के परिवार को 30 हजार रुपये की मदद के साथ घर में जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया है.
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16 साल की मैरी नायडू 10वीं की छात्रा है. भारतीय इंदिरा नगर में प्लास्टिक से बनी झोपड़ी में रहती है. मैरी ने बताया कि पहले उसका घर पक्का हुआ करता था, लेकिन साल 2010 में बीएमसी ने उसे तोड़ दिया, तब से कच्चा झोपड़ा ही उसका आशियाना है, क्योंकि बीएमसी कभी भी तोड़ने आ धमकती है. मेरी ने आरोप लगाया कि बीएमसी वाले उसके सर्टिफिकेट और किताबें भी उठा ले जाते हैं, जिसकी वजह से पढाई में भी बाधा उत्पन्न होती है.
VIDEO : फुटपाथ पर फुटबॉल प्रैक्टिस
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