'खुशनसीब हो जो केरल में हो', वायरल कुंभ गर्ल के पति को लेकर ऐसा क्यों बोला हाईकोर्ट?

कुंभ वायरल गर्ल ने केरल के रहने वाले युवक से शादी की है और वह केरल में रह रही है. विवाद तब बढ़ गया जब पिता ने नाबालिग बताते हुए एमपी में केस दर्ज कराया.

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Mahakumbh Viral Girl: महाकुंभ वायरल गर्ल और उसके पति की अग्रिम जमानत याचिका पर केरल हाईकोर्ट आज फैसला सुना सकता है. कोर्ट ने मंगलवार को दोनों की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए दोनों को भाग्यशाली बताया, क्योंकि वह केरल में हैं. जबकि आरोप हैं कि उन्हें मध्य प्रदेश में अपने विवाह को लेकर धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.

यह मामला एक अंतर-धार्मिक विवाह से शुरू होकर दो राज्यों तक फैली एक जटिल कानूनी और राजनीतिक विवाद में बदल गया है. जस्टिस कौसर एडापगाथ की अदालत में मंगलवार को विवाह की वैधता, दुल्हन की उम्र और दंपती द्वारा सताए जाने के आरोपों को लेकर तीखी बहस के बीच हुई.

'इसलिए दोनों जीवित हैं'

सुनवाई के बीच हाईकोर्ट ने कहा, "आप भाग्यशाली हैं कि आप केरल में हैं." इस पर वायरल गर्ल जोड़े के वकील ने कहा, "यही एकमात्र कारण है कि हम अभी जीवित हैं."

बता दें कि लड़की मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली हैं, जो प्रयागराज के महाकुंभ 2025 में मोतियों की माला बेचते समय वायरल हो गई थी, जिसने पूरे देश में सुर्खियां बटोरीं. इसके बाद उसने केरल के रहने वाले युवक से शादी कर ली.

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लड़की के पिता ने दर्ज कराया है केस

इसके बाद विवाद खड़ा हो गया. लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि वह नाबालिग है और उसके पति के खिलाफ केस भी दर्ज कराया. हालांकि, दोनों अभी केरल में हैं और कोच्चि स्थित हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राहत की गुहार लगाई है.

दोनों के वकील वकील एम. ससिंद्रन ने तर्क दिया कि एमपी में लड़की के नाबालिग होने का झूठ फैलाया जा रहा है और शादी को अमान्य करने का प्रयास कर रहे थे. दंपती का कहना है कि जब शादी हुई तो तब तक वह नाबालिग हो चुकी थी. बाद में आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया, ताकि कुछ और ही लगे.

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एमपी सरकार के वकील ने क्या कहा

मध्य प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने याचिका का कड़ा विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि यह विवाह अपने आप में कानूनी रूप से अस्थिर था, क्योंकि इसे हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न किया गया था, जबकि दूल्हा एक मुस्लिम था.

उन्होंने आगे तर्क दिया कि मोनालिसा की वास्तविक जन्म तिथि दिसंबर 2009 थी, जिससे विवाह के समय वह नाबालिग थीं और उन पर बाल संरक्षण कानूनों के प्रावधान लागू हो सकते थे.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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