राजस्थान के सबसे अमीर मंदिर में बदल गई परंपरा, 56 भोग और मोरपंख चढ़ाने पर लगी रोक, जानें वजह

अगर आप भी राजस्थान के मशहूर सांवरिया सेठ मंदिर में दर्शन करने जाने का प्लान बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. मंदिर प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से तिरुपति मंदिर जैसे कुछ नियम लागू कर दिए हैं.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
चित्तौड़गढ़: श्री सांवरिया सेठ मंदिर में अब मोरपंख और 56 भोग पर बैन, तिरुपति की तर्ज पर लागू हुए नए नियम
NDTV Reporter

Chittorgarh News: राजस्थान का वो चमत्कारी मंदिर जहां भगवान को भक्तों का 'बिजनेस पार्टनर' माना जाता है और जहां के दानपात्र से हर महीने करोड़ों के नोट निकलते हैं, वहां अब एक बड़ा बदलाव हो गया है. मेवाड़ के सुप्रसिद्ध श्री सांवरिया सेठ मंदिर में अब भक्त अपनी मर्जी से '56 भोग' नहीं लगा पाएंगे और न ही भगवान को मोरपंख चढ़ा सकेंगे. मंदिर मंडल ने दर्शन की व्यवस्था को आसान बनाने के लिए ये कड़ा फैसला लिया है.

क्यों बंद हुआ 56 भोग और मोरपंख?

मंदिर में आजकल इतनी भीड़ होने लगी है कि दर्शन के लिए लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं. प्रशासन ने देखा कि जब कोई भक्त '56 भोग' चढ़ाता है, तो उस पूरी प्रक्रिया में करीब 1 घंटा लग जाता है. दिनभर में ऐसे 3-4 भोग लगते थे, जिसकी वजह से आम भक्तों की लाइन रुक जाती थी. अब इन निजी आयोजनों पर रोक लगा दी गई है ताकि लाइन में लगे आखिरी व्यक्ति को भी जल्दी और आसानी से दर्शन मिल सकें. मंदिर मंडल के अध्यक्ष हाजरी दास वैष्णव का कहना है कि अब यहां तिरुपति मंदिर जैसा शानदार मैनेजमेंट लागू किया जा रहा है.

Photo Credit: NDTV Reporter

मिलावट पर लगाम और स्वच्छता का ध्यान

इस फैसले के पीछे एक बड़ी वजह शुद्धता भी है. बाजार में मिलने वाली मिलावटी मिठाइयों और प्लास्टिक वाले मोरपंखों से मंदिर की मर्यादा और स्वच्छता पर असर पड़ रहा था. अब भक्तों को मंदिर के काउंटर से ही शुद्ध बालभोग और राजभोग मिलेगा. साथ ही, गर्भगृह को साफ-सुथरा रखने के लिए प्लास्टिक वाले मोरपंखों पर भी पाबंदी लगा दी गई है.

भक्त अब क्या कर सकेंगे?

अगर आपकी कोई मन्नत पूरी हुई है और आप दान करना चाहते हैं, तो आप पहले की तरह नकद रुपये, सोना या चांदी मंदिर के दानपात्र में भेंट कर सकते हैं. अगर आप भोग ही लगाना चाहते हैं, तो मंदिर के काउंटर पर रसीद कटवाकर सरकारी 'राजभोग' का हिस्सा बन सकते हैं. इससे किसी एक व्यक्ति की वजह से हजारों लोगों की लाइन नहीं रुकेगी.

Advertisement

व्यापारियों के 'पार्टनर' हैं सांवरिया सेठ

इस मंदिर की सबसे अनोखी बात ये है कि यहां के भक्त भगवान को अपने व्यापार का हिस्सेदार मानते हैं और मुनाफे का एक हिस्सा दान करते हैं. यही वजह है कि ये राजस्थान का सबसे अमीर मंदिर है. हालांकि, नियम बदलने से कुछ भक्त थोड़े हैरान हैं, लेकिन ज्यादातर लोग खुश हैं कि अब उन्हें कतारों में घंटों खड़े होकर परेशान नहीं होना पड़ेगा.

ये भी पढ़ें:- 3 KG सोना, 152 किलो चांदी और 46 करोड़ नकद, राजस्थान के इस मंदिर में आया रिकॉर्ड तोड़ चढ़ावा

Advertisement
Featured Video Of The Day
Iran US War: Islamabad पहुंचे Araghchi, पर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से नहीं करेंगे बताचीत | Khamenei