राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून, अधिकांश जिलों में थम रही बारिश, फिर कब बरसेंगे बादल?

मौसम विभाग ने जैसलमेर, बीकानेर, फलोदी, श्रीगंगानगर और बाड़मेर जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है.

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अजमेर में उमड़ते मानसून के बादल
IANS

राजस्थान में फिलहाल मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने वाली है. मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार प्रदेश में 10 जुलाई से अगले एक सप्ताह तक कमजोर मानसूनी परिस्थितियां बनी रहने की संभावना है. इस दौरान अधिकांश जिलों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा और केवल कुछ स्थानों पर हल्की बारिश देखने को मिल सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार को प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. हालांकि इसके अलावा राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां कम रहेंगी. पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश के बाद अब मानसून की सक्रियता में कमी आने से लोगों को राहत मिलेगी लेकिन किसानों की नजर अगले दौर की बारिश पर टिकी रहेगी.

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले सात दिनों के दौरान प्रदेश में किसी बड़े या व्यापक बारिश के सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना फिलहाल नहीं है. ऐसे में अधिकांश जिलों में तेज बारिश की संभावना बेहद कम है. दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है जबकि उमस का असर भी महसूस किया जा सकता है. मौसम विभाग ने बताया कि इस अवधि में केवल छुटपुट स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज हो सकती है जबकि अधिकांश इलाके शुष्क बने रहेंगे. ऐसे में जल भराव और बाढ़ जैसी स्थिति की आशंका भी फिलहाल नहीं है.

मौसम विभाग ने 5 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है
Photo Credit: 
@IMDJaipur

5 जिलों में येलो अलर्ट

आज मौसम विभाग की ओर से 5 जिलों में बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है. आज जैसलमेर, बीकानेर, फलोदी, श्रीगंगानगर और बाड़मेर जिलों तथा इसके आस-पास हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है.

पिछले 24 घंटे की बात करें तो कोटा, अजमेर और उदयपुर संभाग में कई जगहों पर बरसात दर्ज की गई. अजमेर के केकड़ी में सर्वाधिक 49 मिमी बारिश दर्ज की गई. बारां के अंता में 28 मिमी, करौली के सुरोठ में 24 मिमी बरसात दर्ज की गई. 

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मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार मानसून अगले एक सप्ताह तक कमजोर रहेगा. इससे समझा जा सकता है कि अब 17 जुलाई के बाद ही बारिश की संभावना बन सकती है.

खेती के लिए जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के कमजोर पड़ने से खरीफ फसलों की बुवाई वाले क्षेत्रों में किसानों को मौसम पर लगातार नजर रखने की जरूरत होगी. यदि अगले सप्ताह भी पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो कई इलाकों में सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता बढ़ सकती है.

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