Vinesh Phogat after bout: ओलंपियन विनेश फोगाट के लिए पिछले कुछ महीने डब्लूएफआई से रार..फिर कोर्ट..और अब एशियन गेम्स ट्रॉयल में हार तीन शब्दों में सिमट गए हैं. पिछले दिनों ट्रायल में भाग लेने को लेकर रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडियन (WFI) से भिड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एशियाई खेलों के चयन ट्रॉयल में उतरीं दिग्गज पहलवान विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) शनिवार को हारकर बाहर हो गईं. उन्हें हरियाणा की मिनाक्षी ने 6-4 से हराकर एक बार फिर से एशियाई खेलों में पदक जीतने के सपने पर पानी फेर दिया. लेकिन तमाम अड़ंगों, कोर्ट-कचहरी और हार के बाद भारतीय कुश्ती की इस शेरनी के हौसले चट्टान की तरह अडिग है. मुकाबले के बाद फोगाट ने कहा कि वह हारी नहीं हैं और वह मजबूती के साथ वापसी करेंगी. 53 किग्रा वर्ग के सेमीफाइनल में मीनाक्षी से 4-6 से हारने के बाद विनेश के पहले शब्द थे, ‘मैं हारी नहीं हूं.' विश्व चैंपियनशिप की पूर्व पदक विजेता ने कहा, ‘मैं पूरी व्यवस्था से लड़ रही थी. मैं एक तरफ थी और बाकी सब दूसरी तरफ. मैं आज भी गर्व के साथ मैट पर खड़ी हूं.' क्या 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक अभी भी उनका लक्ष्य हैं, तो विनेश ने सकारात्मक जवाब देते हुए कहा, 'बिल्कुल. मैं लॉस एंजिल्स ओलिंपिक के लिए ही मैट पर वापस आई हूं.'
उन्होंने ऐलान किया कि मां बनने के बाद मुकाबले में वापसी करके और उस व्यवस्था के खिलाफ खड़े होकर उन्होंने पहले ही जीत हासिल कर ली है जिसने उनके मुताबिक उन्हें कुश्ती से दूर रखने की हर मुमकिन कोशिश की थी. हारने के कुछ ही मिनटों बाद विनेश ने कुश्ती प्रशासन पर जोरदार हमला बोला. विनेश ने WFI पर भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और उनके पक्ष में अदालत के आदेशों के बावजूद उन्हें कुश्ती में लौटने से रोकने की कोशिशों का आरोप लगाया.
साथ ही, उन्होंने सेमीफाइनल में मिली हार को कोई झटका मानने से इनकार कर दिया.
विनेश 2024 पेरिस ओलंपिक के फाइनल से दिल तोड़ने वाले तरीके से बाहर होने के बाद पहली बार मुकाबले में हिस्सा ले रही थीं. उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मां बनने के बाद फिर से बड़े मुकाबलों में वापसी करना है. उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद और महीनों तक कानूनी और प्रशासनिक लड़ाइयां लड़ने के बाद मुकाबले में वापसी करना उन्हें एक जीत जैसा लगा.
विनेश ने कहा, ‘मेरे बेटे के जन्म को अभी सिर्फ 10 महीने ही हुए हैं. मैं फिर से मैट पर खड़ी हूं और नई पीढ़ी के पहलवानों से मुकाबला कर रही हूं. मुझे खुद पर गर्व है. मुझे उम्मीद है कि मैं अपने बेटे और कई महिला पहलवानों के लिए प्रेरणा बन सकूंगी.' उन्होंने ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को उन महिला पहलवानों के लिए एक ऐतिहासिक पल बताया जो मां बनने के बाद कुश्ती में वापसी करना चाहती हैं जिसने उन्हें ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी थी.
उन्होंने कहा, ‘एक लड़की मां बनने के बाद फिर से मैट पर लौट रही है. अब रास्ता खुल गया है. आज नहीं तो कल, इसके लिए कोई न कोई नीति जरूर बनेगी. जो महिला पहलवान मां बनने के बाद वापसी करना चाहती हैं, उन्हें एक उचित मौका और कुछ छूट मिलनी चाहिए.' इकतीस वर्षीय पहलवान ने आरोप लगाया कि अदालत के दखल के बाद भी, अधिकारियों ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी करना जारी रखा. उन्होंने बताया कि शनिवार सुबह अधिकारियों से उनकी करीब एक घंटे तक बहस हुई, जब उन्हें बताया गया कि 53 किग्रा वर्ग में हिस्सा लेने की उनकी इच्छा के बावजूद उन्हें केवल 50 किग्रा वर्ग में ही मुकाबला करने की अनुमति दी जाएगी.
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विनेश ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘मुझे उचित मौका नहीं दिया गया. मेरी श्रेणी की सभी मजबूत लड़कियों को मेरे ड्रॉ में डाल दिया गया. मुकाबले इस तरह से निर्धारित किए गए थे जिससे मेरे ऊर्जा स्तर पर बुरा असर पड़ा.' इन शिकायतों के बावजूद विनेश ने अपनी हार की जिम्मेदारी स्वीकार की और माना कि प्रतिस्पर्धी अनुभव और सहनशक्ति की कमी ने उनके प्रदर्शन को प्रभावित किया. उन्होंने कहा, ‘मैं अपनी हार स्वीकार करती हूं. मैं और कड़ी मेहनत करूंगी और पहले से ज्यादा मजबूत होकर वापसी करूंगीय फिटनेस और सहनशक्ति की समस्याएं थीं, लेकिन उससे भी ज्यादा मुझे प्रतियोगिताओं की जरूरत थी. मैंने लगभग दो साल से किसी प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया था. मां बनने के बाद यह मेरा पहला टूर्नामेंट था.'
विनेश ने कहा कि शनिवार के प्रदर्शन ने उन्हें यह विश्वास दिला दिया है कि उनमें अभी भी देश की सर्वश्रेष्ठ पहलवानों के साथ मुकाबला करने की पर्याप्त क्षमता है. विनेश ने कहा, ‘आज मैं काफी प्रेरित महसूस कर रही थी. मुझे पता है कि मैं युवा लड़कियों को हरा सकती हूं. मुझमें अब भी वह हिम्मत और आत्मविश्वास बाकी है. अगर मैं कड़ी मेहनत करूंगी, तो मुझे पता है कि मैं और भी मजबूत होकर वापसी कर सकती हूं.'
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