IPO से करोड़ो की कमाई का दिया था झांसा! अंधेरी में CA से 67 लाख आखिर कैसे हुई ठगी, आप भी जान लें

पीड़ित का कहना है कि हर निवेश के बाद WhatsApp पर IPO में पैसा लगाने की पुष्टि वाले मैसेज भेजे जाते थे. जयेश के पास चैट रिकॉर्ड्स और बैंक ट्रांजैक्शन का पूरा ब्योरा मौजूद है. काफी समय तक पैसे वापस न मिलने और टालमटोल के बाद उसे ठगी का अहसास हुआ.

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आईपीओ के नाम पर 67 लाख रुपये की ठगी
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  • योगेश भानुशाली ने खुद को माहिर निवेशक बताकर जयेश को कम समय में बड़ा मुनाफा देने का भरोसा दिलाया था
  • आरोप है कि निवेश को शेयर बाजार में लगाने का दावा कर योगेश ने अपने सहयोगी धवल कक्कड़ की कंपनी का नाम लिया
  • जयेश ने जनवरी से फरवरी 2024 के बीच अलग-अलग किस्तों में योगेश के खाते में ₹67 लाख से ज्यादा ट्रांसफर किए थे
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मुंबई:

अगर आपको कोई IPO में निवेश कर बड़ा मुनाफा दिलाने की बात कहे तो उसके कहे पर पैसे लगाने से पहले एक बार सोचिएगा जरूर. दरअसल, मुंबई के अंधेरी ईस्ट से शेयर बाज़ार और IPO निवेश के नाम पर बड़ी ठगी का मामला सामने आया है. यहां एक 20 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट और कारोबारी को “क्विक प्रॉफिट” का सपना दिखाकर करीब ₹67 लाख ठग लिए गए. पीड़ित ने इस मामले में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है.

पुलिस सूत्रो के अनुसार, पीड़ित युवक की पहचान जयेश के रूप में हुई है. जयेश की मुलाकात स्थानीय निवासी योगेश भानुशाली से हुई थी, जिसने खुद को शेयर मार्केट और ग्रे-मार्केट IPO में माहिर निवेशक बताया. योगेश ने कम समय में मोटा रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया और अपने मोबाइल पर कथित मुनाफ़े के स्क्रीनशॉट भी दिखाए. इतना ही नहीं, भरोसा जीतने के लिए उसने कुछ लोगों से जयेश की बात भी कराई, ताकि लगे कि दूसरे निवेशकों को सच में फायदा हुआ है.

आरोप है कि योगेश ने कहा कि निवेश की गई रकम आधिकारिक तौर पर शेयर बाज़ार में लगाई जाएगी और यह काम उसके सहयोगी धवल कक्कड़ की कंपनी के ज़रिये होगा. जयेश की धवल से फोन पर बात भी कराई गई, जहां उसे सुरक्षित निवेश और अच्छे रिटर्न का भरोसा दिया गया. पारदर्शिता दिखाने के लिए आरोपियों ने ज़ोर दिया कि सारे लेन-देन बैंक के माध्यम से ही हों.

शिकायत के अनुसार, जनवरी से फरवरी 2024 के बीच जयेश ने अलग-अलग किस्तों में अपने बैंक खाते से योगेश के खाते में ₹67 लाख से ज़्यादा ट्रांसफर किए. शुरुआत में कुछ रकम “मुनाफ़े” के तौर पर वापस भी की गई, जिससे जयेश का भरोसा और मजबूत हो गया. लेकिन बाद में जिन निवेशों को अलग-अलग कंपनियों के IPO में लगाए जाने का दावा किया गया, उनसे न तो कोई रिटर्न मिला और न ही मूल रकम वापस आई.

पीड़ित का कहना है कि हर निवेश के बाद WhatsApp पर IPO में पैसा लगाने की पुष्टि वाले मैसेज भेजे जाते थे. जयेश के पास चैट रिकॉर्ड्स और बैंक ट्रांजैक्शन का पूरा ब्योरा मौजूद है. काफी समय तक पैसे वापस न मिलने और टालमटोल के बाद उसे ठगी का अहसास हुआ, जिसके बाद उसने पुलिस का दरवाज़ा खटखटाया. फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है., संबंधित बैंक खातों, मोबाइल चैट्स और निवेश से जुड़े दस्तावेज़ों की गहराई से पड़ताल की जा रही है. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस तरह से और कितने लोगों को ठगा गया है.

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