BMC New Commissioner Appointment: महाराष्ट्र की सीनियर IAS अधिकारी अश्विनी भिडे इन दिनों सुर्खियों में हैं. अश्विनी भिडे, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं, उन्हें बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) का कमिश्नर नियुक्त किया गया है. वह इस पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला बन गई हैं. ‘मेट्रो वुमन' के नाम से मशहूर अश्विनी भिडे न सिर्फ एक सख्त और कुशल प्रशासक मानी जाती हैं, बल्कि मुंबई के सबसे जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अंडरग्राउंड मेट्रो (Underground Metro) को जमीन पर उतारने का श्रेय भी उन्हें ही दिया जाता है.
वर्तमान नगर आयुक्त भूषण गगराणी का कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है. संजय मुखर्जी और असीम गुप्ता सहित अन्य उम्मीदवारों पर भी विचार किया गया था, लेकिन उनके अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली को देखते हुए अश्विनी भिडे को इस पद के लिए चुना गया.
शुरुआती जीवन और शिक्षा
अश्विनी भिडे (IAS Ashwini Bhide) का जन्म महाराष्ट्र के सांगली में हुआ. वे 1995 बैच की IAS अधिकारी हैं और UPSC में उन्होंने महिला उम्मीदवारों में टॉप और ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की थी. उन्होंने अंग्रेज़ी साहित्य में पोस्टग्रेजुएशन और MBA की पढ़ाई की, जिसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में कदम रखा.
करियर की शुरुआत से बड़े प्रशासनिक पदों तक
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने कोल्हापुर में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में की. इसके बाद सिंधुदुर्ग और नागपुर में जिला परिषद की CEO रहते हुए उन्होंने जल प्रबंधन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया. बाद में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल की डिप्टी सेक्रेटरी बनीं और फिर मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) में एडिशनल मेट्रोपॉलिटन कमिश्नर के रूप में काम किया, जहां उन्होंने कई बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया.
‘मेट्रो वुमन' बनने की कहानी
अश्विनी भिडे को सबसे ज्यादा पहचान मुंबई मेट्रो-3 (कुलाबा-बांद्रा-सीप्ज़) प्रोजेक्ट से मिली. वे 2015 से 2020 तक मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (MMRCL) की मैनेजिंग डायरेक्टर रहीं और इस महत्वाकांक्षी अंडरग्राउंड मेट्रो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाई. मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहर में जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों, पर्यावरण विवादों और राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद प्रोजेक्ट को गति देना उनकी प्रशासनिक क्षमता का बड़ा उदाहरण माना जाता है. यही वजह है कि उन्हें ‘Metro Woman' के नाम से जाना जाने लगा.
फडणवीस सरकार में अहम भूमिका
वर्तमान में अश्विनी भिडे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में Additional Chief Secretary के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का करीबी और भरोसेमंद अधिकारी माना जाता है. वे पहले भी फडणवीस सरकार के दौरान अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर चुकी हैं, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर उनका प्रभाव मजबूत माना जाता है.
विवाद और दृढ़ निर्णय क्षमता
अश्विनी भिडे अपने फैसलों को लेकर भी चर्चा में रही हैं. आरे कॉलोनी में मेट्रो कारशेड को लेकर हुए विवाद के दौरान उन्होंने खुलकर प्रोजेक्ट का समर्थन किया और अपने फैसले पर कायम रहीं. उनकी यही स्पष्टता और निर्णायक नेतृत्व शैली उन्हें एक मजबूत प्रशासक के रूप में स्थापित करती है.
कोविड प्रबंधन में भी अहम भूमिका
कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें मुंबई महानगरपालिका में अतिरिक्त आयुक्त के रूप में तैनात किया गया था, जहां उन्होंने कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और हेल्थ सिस्टम मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
महिला नेतृत्व को बढ़ावा: महायुति सरकार की रणनीति
महाराष्ट्र में हाल के वर्षों में महिला अधिकारियों को शीर्ष पदों पर नियुक्त करने की प्रवृत्ति बढ़ी है. रश्मि शुक्ला जनवरी 2024 में राज्य की पहली महिला पुलिस महानिदेशक (DGP) बनीं. सुजाता सौनिक 2024 में पहली महिला मुख्य सचिव बनीं. अब अश्विनी भिडे की BMC कमिश्नर के पद पर नियुक्ति इसी क्रम का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है.
क्यों खास है यह नियुक्ति?
अगर अश्विनी भिडे BMC कमिश्नर बनना केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं होगा, बल्कि मुंबई के शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी . इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस में तेजी आएगी .
महिला नेतृत्व को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा
अश्विनी भिडे एक ऐसी अधिकारी हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर से लेकर मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तक अपनी क्षमता साबित की है. ‘मेट्रो वुमन' से लेकर संभावित BMC कमिश्नर तक का उनका सफर न सिर्फ प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टि से शहरों का भविष्य बदला जा सकता है.














