Maharashtra Water Crisis: महाराष्ट्र में पानी की किल्लत शुरू हो गई है, जहां बीएमसी ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका 15 मई से पानी की सप्लाई में 10 प्रतिशत की कटौती शुरू की है. वहीं, छत्रपती संभाजीनगर जिले में भी जलसंकट छा गया है. जिले के 101 गांवों की प्यास बुझाने के लिए 160 टैंकर सहारा बने हुए हैं. वहीं, प्रशासन ने निजी कुओं का अधिग्रहण शुरू कर दिया है. छत्रपती संभाजीनगर जिले के ग्रामीण इलाकों में जलस्रोत सूखने के कारण नागरिकों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है.
बढ़ती किल्लत को देखते हुए प्रशासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं. जिले के 101 गांवों के लगभग 6 लाख 75 हजार नागरिक पानी की कमी का सामना कर रहे हैं. इस आबादी की प्यास बुझाने के लिए प्रशासन वर्तमान में 160 टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति कर रहा है.
कुएं और बोरवेल सूखे
छत्रपती संभाजीनगर जिले (Chhatrapati Sambhajinagar Water Supply) के गांवों के सार्वजनिक कुएं और बोरवेल पूरी तरह सूख चुके हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक दिख रही है. पानी के संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने अब निजी जलस्रोतों का सहारा लेना शुरू कर दिया है. अब तक जिले के 116 गांवों में कुल 118 निजी कुओं का अधिग्रहण किया जा चुका है.
अधिग्रहित किए गए कुओं में से 57 कुओं का विशेष रूप से टैंकर भरने के लिए उपयोग किया जा रहा है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में समय पर पानी पहुंचाया जा सके. प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि आने वाले दिनों में तापमान बढ़ने पर पानी की आपूर्ति सुचारू बनी रहे.
मुंबई में तेजी से घट रहा जलाशयों में पानी
वहीं, मुंबई में भी भीषण गर्मी और जलाशयों में तेजी से घटते जलस्तर को देखते हुए BMC ने पानी की आपूर्ति में कटौती की है. यह कदम संभावित जल संकट से निपटने के लिए एहतियातन उठाया गया है. BMC के अनुसार, इस समय मुंबई को पानी देने वाले सभी जलाशयों में मिलाकर केवल 23.52 प्रतिशत उपयोगी पानी भंडार ही बचा है. गर्मी के मौसम और बारिश में कमी की आशंका के कारण जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.














