राज ठाकरे को गले लगा उद्धव ठाकर ने क्या हाथ जला लिए, मुंबई BMC चुनाव में आखिरी किला भी ढहा

राज ठाकरे को गले लगा उद्धव ठाकर ने क्या हाथ जला लिए? मुंबई BMC चुनाव में आखिरी ठाकरे परिवार का किला ढहता हुआ नजर आ रहा है. क्‍या इसकी वजह ठाकरे बंधुओं का साथ आना है, जिसकी वजह से उत्‍तर भारतीय वोटर्स उनके नाराज हो गए.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • उद्धव ठाकरे ने एक 'गलती' की और उनका मुंबई का पूरा किला ढहता हुआ नजर आ रहा है.
  • उद्धव ठाकरे की शिवसेना बीएमसी में केवल 53 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है जबकि बीजेपी 66 वार्डों में आगे है
  • राज ठाकरे से गठबंधन करने के कारण उत्तर भारतीय वोटरों का समर्थन शिवसेना से छिटकने की संभावना बढ़ी है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
मुंबई:

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद शिवसेना उद्धव ठाकरे के लिए मुंबई समेत 29 नगर निगमों का चुनाव बेहद अहम था. खासकर उद्धव ठाकरे पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका चुनाव में 25 साल पुराना दबदबा बनाए रखने का दारोमदार था. लेकिन उद्धव ठाकरे ने एक 'गलती' की और उनका मुंबई का पूरा किला ढहता हुआ नजर आ रहा है. बीएमसी में उद्धव ठाकरे की शिवसेना सिर्फ 53 वार्डों में आगे नजर आ रही है. वहीं, बीजेपी 66 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है.  

राज ठाकरे से हाथ मिलाना बड़ी गलती!

महाराष्‍ट्र में राज ठाकरे की छवि एक ऐसे नेता की है, जो उत्‍तर भारतीयों को बिल्‍कुल पसंद नहीं करते हैं. ऐसे में राज ठाकरे से हाथ मिलाकर उद्धव ठाकरे ने बड़ी गलती की, कई विश्‍लेषक इस बात को कह रहे हैं. राज से हाथ मिलाते ही उद्धव से उत्‍तर भारतीय वोटर छिटक गए. यह एक बड़ा कारण माना जा रहा है कि उद्धव की पार्टी को बीएमसी चुनाव में ज्‍यादा सीटें मिलती नजर नहीं आ रही हैं.   


25 साल की एंटी इनकंबेंसी 

बीएमसी पिछले 25 सालों से ठाकरे परिवार का मजबूत किला रहा है. ऐसे में माना जा रहा है कि 25 साल की एंटी इनकंबेंसी का भी उद्धव ठाकरे को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. आमतौर पर ऐसा देखने को मिलता है कि जब कोई पार्टी काफी समय से सत्‍ता में होती है, तो उसके खिलाफ एक माहौल बनने लगता है. यह एंटी इनकंबेंसी चुनाव परिणाम में देखने को मिलती है.   

ये भी पढ़ें :- महाराष्‍ट्र में कांग्रेस को कहां से गुडन्‍यूज, कोल्‍हापुर समेत 4 नगर निगम में पार्टी को बढ़त


जनसभाओं की जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस पर ज्यादा जोर

बीएमसी चुनाव के दौरान देखने को मिला कि जहां बीजेपी जमीन पर उतरी और उसके नेताओं ने कई रैलियां कीं, वहीं उद्धव ठाकरे और उसके नेता जनसभाओं की जगह प्रेस कॉन्फ्रेंस करते नजर आए. ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान ज्‍यादा लोगों तक अपनी आवाज नहीं पहुंचा सके. इसका खामियाजा होता दिख रहा है. वहीं, दूसरी ओर मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बुलेट लेकर अपने कार्यकर्ताओं संग चुनाव प्रचार करते नजर आए. वे वोटरों तक पहुंचे, जिसका उन्‍हें लाभ मिलता नजर आ रहा है.   

मराठी वोटों पर ही निर्भरता

ठाकरे बंधु अभी तक 'मराठी मानुष' की राजनीति करते नजर आए हैं. इस बार भी ठाकरे बंधुओं की निर्भरता मराठी वोटों पर ही देखने को मिली. हालांकि, देवेंद्र फडणवीस ने भी इस बार खुलकर कहा कि वहीं भी मराठी हैं. एनडीटीवी को दिये एक इंटरव्‍यू में फडणवीस ने कहा था, 'मैं भी मराठी हूं, मैं किसी दूसरे राज्‍य से नहीं आया हूं. नागपुर, महाराष्‍ट्र में ही है. मैं भी मराठी लोगों के हक के लिए हमेशा खड़ा रहता हूं.' बीजेपी इस बार मराठी वोट बैंक में भी सेंध लगाने में कामयाब होती दिखी है.   

ये भी पढ़ें :- मुंबई BMC चुनाव में 27 सीटों के नतीजे आ गए, BJP-शिवसेना शिंदे का जलवा, नवाब मलिक के भाई हारे, देखें लिस्ट

Advertisement
Featured Video Of The Day
BMC Election Results 2026: BJP में Mayor के नाम पर हलचल तेज! | Maharashtra | Mumbai | BMC Polls