मुंबई की दहलीज पर 'लाल सैलाब', कहां पहुंचा 30 हजार किसानों का मार्च, कहां पहुंची सरकार से बात?

मुंबई की दहलीज पर 30 हजार से ज़्यादा किसान पहुंच रहे हैं. अगर यह लाल सैलाब शहर में घुसा तो आर्थिक राजधानी की रफ्तार थम जाएगी. सरकार किसानों को मनाने की कोशिश कर रही है. यह बातचीत कहां तक पहुंची, जानें?

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मुंबई की ओर बढ़ रहा किसानों का लॉन्ग मार्च, इससे हाई वे पर जाम भी लगा.
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  • मुंबई की ओर जा रहे करीब 30 हजार आदिवासी किसानों के लॉन्ग मार्च पर सरकार और किसान प्रतिनिधिमंडल में बात हुई.
  • बैठक में सरकार ने किसानों को उनकी मांगों को समय सीमा के भीतर पूरा करने का आश्वासन दिया है.
  • किसान प्रतिनिधिमंडल के CM फडणवीस से मिलने के बाद लॉन्ग मार्च वापस लेने की संभावना जताई जा रही है.
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मुंबई:

अपनी मांगों को लेकर नासिक से मुंबई की ओर कूच कर रहे करीब 30 हजार आदिवासी किसानों के 'लॉन्ग मार्च' पर सरकार और किसान प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई मैराथन बैठक के बाद अब यह आंदोलन खत्म होने के आसार नजर आ रहे हैं. नासिक के राजुर बहुला से निकला यह विशाल मार्च मंगलवार देर रात ठाणे के शाहपुर पहुंच जाएगा. किसानों का जत्था रात को शाहपुर के खरड़ी गांव में विश्राम करेगा. आगरा-मुंबई राजमार्ग पर हजारों किसानों की मौजूदगी को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है और ट्रैफिक रूट में भी बदलाव किए गए हैं.

किसान सभा और राज्य के मंत्रियों से हुई 3 घंटे तक चर्चा

ऑल इंडिया किसान सभा (AIKS) के प्रतिनिधिमंडल और राज्य के मंत्रियों, गिरीश महाजन व चंद्रशेखर बावनकुले के बीच करीब 3 घंटे तक गहन चर्चा हुई. बताया जा रहा है कि यह चर्चा काफी सकारात्मक रही है. सरकार ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे मंत्री गिरीश महाजन खुद ठाणे के शाहपुर जाकर किसानों से मुलाकात करेंगे. 

सीएम से मुलाकात के बाद लॉन्ग मार्च वापस लेने का हो सकता है अनुमान

इससे पहले किसान प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से एक शिष्टाचार भेंट करेगा. संभावना जताई जा रही है कि मंगलवार दोपहर तक किसान इस लॉन्ग मार्च को वापस लेने का आधिकारिक एलान कर वहीं से वापस लौट सकते हैं. अगर 30 हजार किसानों का यह 'लॉन्ग मार्च' मुंबई की सीमाओं में दाखिल होता है, तो इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं. मुंबई की lसड़कों पर इसका सबसे बड़ा असर दिखेगा.

मुंबई पहुंचा किसानों का मार्च तो चरमरा जाएगी स्थिति

नासिक और ठाणे की ओर से आने वाला यह मुख्य रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो सकता है. आमतौर पर ऐसे मोर्चे दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान में पड़ाव डालते हैं. 30 हजार किसानों के जुटने से पूरा फोर्ट इलाका और सीएसएमटी स्टेशन के पास की व्यवस्था चरमरा सकती है जैसा मराठा आंदोलन के वक्त नज़ारा दिखा था 

  • अगर किसान मंत्रालय या विधान भवन की ओर बढ़ने की कोशिश करते हैं, तो पुलिस को भारी बैरिकेडिंग करनी होगी. इतनी बड़ी संख्या में किसानों का मुंबई पहुंचना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. 
  • यही वजह है कि मंत्री गिरीश महाजन और चंद्रशेखर बावनकुले लगातार बातचीत कर रहे हैं. सरकार की पूरी कोशिश है कि शाहपुर में ही सुलह हो जाए, क्योंकि एक बार यह हुजूम मुंबई की सीमा में घुस गया, तो उसे नियंत्रित करना और वापस भेजना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

आदिवासी किसानों के लॉन्ग मार्च का क्या है कारण?

आदिवासी किसानों के इस 'लॉन्ग मार्च' की मांगों में सबसे प्रमुख मुद्दा 'वन भूमि अधिकार कानून' का प्रभावी कार्यान्वयन है, जिसके तहत वे वर्षों से जोत रहे वन क्षेत्र की जमीनों पर अपने मालिकाना हक और राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. 

इसके साथ ही, किसान स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार फसलों के लिए उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), पूर्ण कर्जमाफी और खेती के लिए दिन में निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे हैं. 

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उनकी मांगों में बुढ़ापे के लिए पेंशन योजना का विस्तार, सूखे और बेमौसम बारिश से हुए नुकसान का मुआवजा, और वैनगंगा-पिंजाल जैसी नदी जोड़ परियोजनाओं के पानी का रुख मोड़ने की मांग भी शामिल है ताकि आदिवासी क्षेत्रों में पानी का संकट दूर हो सके.

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