अजित पवार गुट के 22 विधायक शरद पवार के संपर्क में ? सुप्रिया सुले बोलीं- विलय पर कोई चर्चा नहीं

मुंबई में शरद पवार की मौजूदगी में एनसीपी (एसपी) की अहम बैठक हुई, जिसमें सुप्रिया सुले और शशिकांत शिंदे ने पार्टी के विलय की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया. इस बैठक के बीच सबसे बड़ी खबर यह आ रही है कि अजीत पवार गुट के करीब 22 विधायक शरद पवार के संपर्क में हैं और पाला बदल सकते हैं.

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  • मुंबई के में शरद पवार की मौजूदगी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों और विधायकों की बैठक हुई
  • बैठक में पार्टी के विलय की अफवाहों को विधायकों ने नेतृत्व से स्पष्ट करने की मांग की थी
  • सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल ने पार्टी के विलय की खबरों को पूरी तरह खारिज किया और पार्टी मजबूत करने की बात कही
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Sharad Pawar Mumbai Meeting: मुंबई के वाईबी चव्हाण सेंटर में बुधवार को शरद पवार की मौजूदगी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के रणनीतिकारों और विधायकों का जमावड़ा लगा. इस बैठक में एजेंडा सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में  राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) गुट की सक्रियता बढ़ाने का भी था.'तुतारी' चुनाव चिह्न के सहारे जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने का दम भर रही एनसीपी (एसपी) ने इस बैठक के जरिए अपने कैडर को रिचार्ज करने की कोशिश की. लेकिन इस पूरी बैठक की सबसे बड़ी सुगबुगाहट कांग्रेस या अन्य दलों के साथ विलय के सस्पेंस और अजीत पवार गुट के भीतर मची कथित बगावत को लेकर रही, जिसने पूरी चर्चा को विशुद्ध रूप से सियासी रंग दे दिया.

सुप्रिया सुले बोलीं- 'अभी विलय पर कोई चर्चा नहीं'

बैठक के भीतर का माहौल तब बेहद दिलचस्प हो गया जब उपस्थित विधायकों ने पार्टी के किसी अन्य दल में विलय की चल रही खबरों पर सीधे नेतृत्व को घेर लिया. विधायकों का दो टूक कहना था कि इस तरह की अफवाहों से जमीन पर चौबीसों घंटे काम करने वाले कार्यकर्ताओं के बीच भारी भ्रम पैदा हो रहा है और इसका सीधा नुकसान संगठन को होगा.

विधायकों की इच्छा थी कि खुद 'पावर सेंटर' शरद पवार इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें. हालांकि, पूरे घटनाक्रम के दौरान राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार ने रहस्यमयी मौन साधे रखा, जिससे कुछ विधायकों के बीच खुलकर और बेचैनी भी साफ दिखाई दी.


शरद पवार की इस चुप्पी के बीच पार्टी के अन्य शीर्ष सिपहसालारों ने मोर्चा संभाला और विलय की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया. सांसद सुप्रिया सुले और वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने साफ किया कि विलय को लेकर शीर्ष स्तर पर कोई बातचीत नहीं चल रही है और हमारा एकमात्र लक्ष्य अपनी ही पार्टी को और मजबूत तथा बड़ा बनाना है. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट लहजे में कह दिया कि अब इस तरह की किसी भी विलय की चर्चा की गुंजाइश खत्म हो चुकी है और इस पर पूरी तरह से विराम लग चुका है.
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अजीत पवार गुट के 22 विधायक शरद पवार के संपर्क में? बैठक के बीच लगी अटकलें

दरअसल, इस सियासी बवाल की पटकथा कुछ दिनों पहले ही लिखी जा चुकी थी, जब अजीत पवार गुट के दो कद्दावर नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल गुपचुप तरीके से शरद पवार से मिलने पहुंचे थे. इस मुलाकात के बाद से ही महाविकास अघाड़ी और महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म था.

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अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, अजीत पवार गुट के भीतर तटकरे और पटेल की इस 'सीक्रेट डिप्लोमेसी' को लेकर भारी नाराजगी है. यही वजह थी कि शरद पवार गुट के विधायक चाहते थे कि उनकी पार्टी इस पूरे घटनाक्रम पर अपना स्टैंड पूरी तरह क्रिस्टल क्लियर रखे ताकि कोई सियासी गफलत न रहे.

इसी तनातनी के बीच बैठक के समानांतर एक और बड़ी खबर बाहर आई जिसने महायुति सरकार के खेमे में हड़कंप मचा दिया. सूत्रों का दावा है कि अजीत पवार गुट के भीतर चल रहे अंदरूनी कलह और अपनी ही सरकार में उपेक्षा से नाराज लगभग 22 विधायकों ने पिछले कुछ दिनों में शरद पवार से मुलाकात की है. बताया जा रहा है कि ये विधायक पाला बदलने की पूरी तैयारी में हैं और सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं. हालांकि, इतनी बड़ी सियासी हलचल के बावजूद इस आधिकारिक बैठक के भीतर अजीत पवार की एनसीपी के किसी भी नेता का नाम लेकर कोई सीधी चर्चा नहीं की गई, जो अपने आप में शरद पवार की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

नीट पेपर लीक और देश के ज्वलंत मुद्दों पर मंथन, युवाओं से संवाद साधेगी पार्टी

पार्टी ने केवल बंद कमरों की सियासत तक खुद को सीमित न रखते हुए जनता से जुड़े मुद्दों पर भी आक्रामक रुख अपनाने का फैसला किया है. नेताओं ने देश में बढ़ रहे ईंधन संकट और लगातार आसमान छूती महंगाई के मुद्दे पर विस्तृत रणनीति तैयार की. इसके साथ ही, देश भर के छात्रों और अभिभावकों के बीच आक्रोश का कारण बनी नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक और महाधांधली के मामले पर भी गंभीरता से चर्चा की गई.साफ है कि शरद पवार ने एक तरफ जहां अपने कुनबे को एकजुट रखने के लिए मौन का सहारा लिया है, वहीं दूसरी तरफ अजीत पवार के किले में सेंध लगने की बातों को भी हवा दी है. 
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