रोहित शेट्टी फायरिंग केस: बिश्‍नोई गैंग का था शातिर प्‍लान, 'डेड ड्रॉप' मॉडल से अवैध हथियारों तक बड़ा खुलासा

बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक रोहित शेट्टी के घर फायरिंग मामले में क्राइम ब्रांच के सूत्रों ने बताया कि हमले के लिए शूटर को न सीधे हथियार दिए और न ही वाहन. इसके बजाय बिश्‍नोई गैंग ने 'डेड ड्रॉप' मॉडल अपनाया यानी लॉजिस्टिक्स और शूटर के बीच कोई सीधा संपर्क नहीं था.

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  • रोहित शेट्टी फायरिंग मामले में बिश्नोई गैंग ने डेड ड्रॉप मॉडल अपनाया, जिससे इस मामले की कड़ी न जोड़ी जा सके.
  • जांच में सामने आया कि शूटर बिहार का रहने वाला है और उसने घटना से पहले रोहित शेट्टी के घर की कई बार रेकी की थी.
  • पुलिस फंडिंग, बैंक ट्रांजेक्शन, फोरेंसिक जांच और अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए व्यापक जांच कर रही है.
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मुंबई:

बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक रोहित शेट्टी के घर पर हुई फायरिंग की घटना में मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के आगे बढ़ने के साथ ही साजिश के लिए अपनाए गए बेहद चालाक प्लान की तस्वीर भी साफ हो रही है. जांच से यह सामने आया है कि बिश्नोई गैंग ने इस पूरी वारदात को इस तरह अंजाम देने की कोशिश की गई है, जिससे पुलिस किसी भी हालत में पूरी चेन तक न पहुंच सके. अब इस मामले की जांच के दायरे में रेकी, अवैध हथियारों की सप्लाई, फंडिंग और संभावित इंटरनेशनल कनेक्शन तक शामिल हैं.

क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, इस हमले में शूटर को न तो सीधे हथियार दिया गया और न ही वाहन. इसके बजाय गैंग ने “डेड ड्रॉप” मॉडल अपनाया यानी लॉजिस्टिक्स और शूटर के बीच कोई सीधा संपर्क ही नहीं रखा गया. मास्टरमाइंड शुभम लोनकर के निर्देश पर शूटर के लिए स्कूटी पहुंचाने की पूरी योजना बनाई गई थी. जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी स्वप्निल सकट और सिद्धार्थ येनपुरे पुणे से स्कूटी लेकर मुंबई आए जरूर, लेकिन उन्होंने कभी शूटर से मुलाकात नहीं की. दोनों आरोपियों ने स्कूटी को मुंबई में एक तय जगह पर पार्क किया और बिना समय गंवाए वापस पुणे लौट गए.

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शूटर को नहीं पहचानते थे अन्‍य आरोपी!

इसके बाद जैसे ही निर्देश मिला, शूटर अकेले उस लोकेशन पर पहुंचा और स्कूटी अपने कब्जे में ले ली. पुलिस सूत्रों के अनुसार यह साजिश का ही हिस्सा था कि स्कूटी लाने वाले आरोपी और शूटर एक-दूसरे को पहचानते तक नहीं थे. जानबूझकर ऐसा इंतजाम किया गया, जिससे अगर लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले आरोपी पकड़े भी जाएं तो उनसे शूटर या आगे की कड़ी तक कोई सुराग न मिले. पुलिस मान रही है कि यही वजह है कि वारदात के कई दिन बाद भी मुख्य शूटर अब तक फरार है.

जांच में यह भी पता चला है कि फायरिंग में इस्तेमाल की गई पिस्टल भी पुणे से ही मुंबई लाई गई थी. इस हथियार को स्कूटी की डिक्की में छिपाकर लाया गया था. स्कूटी मिलने के बाद शूटर ने उसी पिस्टल से रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग की. हालांकि वारदात के बाद शूटर ने हथियार को कहां ठिकाने लगाया, यह उसकी गिरफ्तारी के बाद ही साफ हो पाएगा.

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लोनकर के दोस्‍त बताए जा रहे कुछ आरोपी

क्राइम ब्रांच को ऐसे संकेत भी मिले हैं कि यह पिस्टल शुभम लोनकर के निर्देश पर पुणे से खरीदी गई थी. हथियार की कीमत, उसकी सप्लाई चेन और इसमें किस-किस की भूमिका रही, इसे लेकर आरोपी आसाराम फासले से लगातार पूछताछ की जा रही है. साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि यह हथियार पहले किसी और आपराधिक मामले में तो इस्तेमाल नहीं हुआ था. इसके लिए बैलिस्टिक रिपोर्ट और पुराने केस रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है.

इस केस में गिरफ्तार कुछ आरोपी शुभम लोनकर के बचपन के दोस्त बताए जा रहे हैं, जो उसके नाम और उसकी आपराधिक छवि से प्रभावित होकर इस साजिश का हिस्सा बने. हालांकि पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले में अलग-अलग मॉड्यूल काम कर रहे थे. शुरुआती जांच में सामने आया है कि शूटर और उसे लॉजिस्टिक सपोर्ट देने वाले आरोपी अलग मॉड्यूल से जुड़े थे और उनके बीच कभी सीधी मुलाकात नहीं हुई.

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अब तक की जांच में केवल स्वप्निल सकट का ही आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, जिसके खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत एक मामला दर्ज है. बाकी आरोपियों का कोई बड़ा आपराधिक इतिहास फिलहाल पुलिस रिकॉर्ड में नहीं मिला है.

बिहार का रहने वाला है मुख्‍य शूटर 

जांच में सामने आया है कि संदिग्ध शूटर बिहार का रहने वाला है और अपने चार-पांच साथियों के साथ मुंबई में रुका था. कथित तौर पर उसने घटना से पहले शेट्टी के घर की तीन-चार बार रेकी की थी. जांच के दौरान, पुलिस ने आरोपी स्वप्निल सकट के घर से एक पिस्तौल, तीन मैगजीन और एक एयर गन बरामद की थी. जांच में पता चला है कि ये हथियार कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता और फरार आरोपी शुभम लोनकर के निर्देश पर गिरफ्तार आरोपी आसाराम फसाले ने स्वप्निल को सौंपे थे. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इन हथियारों का इस्तेमाल किसी और अपराध में किया गया था. 

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पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि  साजिश को अंजाम देने के लिए फंडिंग का इंतजाम किया गया था. इस पैसे का इस्तेमाल कथित तौर पर स्कूटी और अपराध में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजें खरीदने के लिए किया गया था. अधिकारी अब पैसे के लेन-देन का पता लगाने के लिए बैंक खातों और फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रहे हैं. 

फसाले का फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजा

जांचकर्ताओं ने पाया कि आरोपी एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप 'सिग्नल' के जरिए बातचीत कर रहे थे. पकड़े जाने से बचने के लिए कुछ संदिग्धों ने सबूत मिटाने की कोशिश में ऐप डिलीट कर दिया था. पुलिस ने पांचवें आरोपी आसाराम फसाले का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है, जिससे डिलीट किया गया डेटा और चैट रिकवर किया जा सके. 

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अपराध में इस्तेमाल अतिरिक्त हथियार और वाहन बरामद करने, आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ करने और साजिश में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करने के प्रयास भी जारी हैं. 

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