महज 800 रुपये के मुनाफे के लिए मिलाया जानलेवा 'मेथनॉल', पुणे जहरीली शराब कांड में बड़ा खुलासा

पुणे जहरीली शराब कांड की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने महज ₹800 के मुनाफे के लिए देसी शराब में मेथनॉल मिलाया था. घटना से 15 दिन पहले ऑनलाइन केमिकल खरीदकर स्टॉक किया गया था, जिसे बाद में शराब में मिलाकर जहरीला बना दिया गया.

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  • पुणे के पिंपरी-चिंचवड इलाके में जहरीली शराब में मेथनॉल मिलाने से दस से अधिक लोगों की मौत हुई है
  • मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े ने शराब में मेथनॉल मिलाकर प्रति कैन लगभग आठ सौ रुपये का मुनाफा कमाया
  • आरोपी ने मेथनॉल केमिकल ऑनलाइन खरीदकर 15 दिन पहले स्टॉक जमा कर रखा था, जो जहरीला और ज्वलनशील है
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पुणे के पिंपरी-चिंचवड इलाके में जहरीली शराब कांड की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में महज कुछ सौ रुपये के मुनाफे के लिए शराब में घातक ‘मेथनॉल' केमिकल मिलाया गया, जिससे 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और इलाके में दहशत फैल गई. मामले की जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी योगेश वानखेड़े ने देसी शराब में जानलेवा ‘मेथनॉल' मिलाकर उसे जहरीला बनाया. आरोपी ने राधेश्याम प्रजापति से शराब खरीदकर उसमें भारी मात्रा में पानी मिलाया और नशा बरकरार रखने के लिए मेथनॉल मिला दिया. यह सब प्रति कैन करीब 800 रुपये के मुनाफे के लिए किया गया.

घटना से 15 दिन पहले खरीदा था केमिकल

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने वारदात को अंजाम देने से करीब 15 दिन पहले एक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए मेथनॉल केमिकल खरीदा और उसका स्टॉक जमा कर लिया था. मेथनॉल, जिसे वुड अल्कोहल भी कहा जाता है, एक जहरीला और ज्वलनशील केमिकल है, जिसका इस्तेमाल औद्योगिक सॉल्वैंट्स, एंटीफ्रीज और पेंट बनाने में किया जाता है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, शराब पीने के बाद कई लोग अचानक बीमार पड़ने लगे और फिर एक के बाद एक मौत होने लगी.

चार आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी

पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों योगेश वानखेड़े, राधेश्याम प्रजापति, मिरका सिंह और गुरु मंगल सिंह को गिरफ्तार किया है. सभी को पिंपरी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 8 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि जहरीली शराब कहां से आई और इसमें और कौन-कौन शामिल है.

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परिवारों की आपबीती

मृतक के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उनके रिश्तेदार बाबा शेख और उनका दोस्त अकबर पठान अक्सर साथ में शराब पीते थे. शुरुआत में तबीयत खराब होने को सामान्य बीमारी समझा गया, लेकिन हालत बिगड़ती गई और बाबा शेख की मौत हो गई. अगले ही दिन अकबर पठान की भी उसी तरह हालत बिगड़ी. दोनों के मुंह से झाग आ रहा था और बाद में पता चला कि इलाके में 10–12 लोगों की इसी तरह मौत हुई है.

इलाके में गुस्सा और डर का माहौल

घटना के बाद कई परिवारों में मातम है और लोगों में गुस्सा है. जिन घरों के कमाने वाले सदस्य की मौत हुई, वहां बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि इस तरह का अवैध धंधा बंद हो सके. एक स्थानीय महिला उषा साठे ने कहा, “हमारी छोटी सी बस्ती में इतनी बड़ी त्रासदी हो गई है. प्रशासन को इस पर रोक लगानी चाहिए।.शराब ही इन सबका कारण है और इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए.”

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