NEET पेपर लीक मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस पूरे घोटाले के तार जब महाराष्ट्र के लातूर से जुड़ा, तो एक ऐसा नाम सामने आया, जिसने शिक्षा के नाम पर अपना एक विशाल साम्राज्य खड़ा कर रखा है और वह शिवराज मोटेगावकर है. कभी सिर्फ 10 छात्रों को एक छोटे से कमरे में पढ़ाने वाले मोटेगावकर की आज महाराष्ट्र के 28 जिलों में 'Caching फैक्ट्रियां' चल रही हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बंद पड़ी फैक्ट्रियों के खंडहरों पर करोड़ों का यह कॉर्पोरेट बिजनेस कैसे खड़ा हुआ? आइए जानते हैं इसके पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी.
यह कहानी साल 2000 के आसपास से शुरू होती है. लातूर के पुराने एमआईडीसी (MIDC) परिसर से जब उद्योग धंधे नए इलाके में शिफ्ट हुए, तो वहां सन्नाटा पसर गया. इसी सुनसान और बंद पड़ी फैक्ट्रियों वाले इलाके में शिवराज मोटेगावकर ने अपनी पहली प्राइवेट ट्यूशन क्लास की नींव रखी थी. शुरुआत में मोटेगावकर सिर्फ केमिस्ट्री (रसायन विज्ञान) पढ़ाता था. लेकिन डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना देखने वाले छात्रों की भीड़ इस कदर बढ़ी कि देखते ही देखते यह सुनसान इलाका एक बड़े कोचिंग हब में बदल गया.
जब 1,500 छात्रों का बनने लगा एक बैच
मोटेगावकर की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2016 आते आते उसके एक एक बैच में 1,500 से ज्यादा छात्र बैठने लगे. वह दिनभर में ऐसी 3 से 4 बैचेस लेता था. इसके साथ ही कमाई का ग्राफ भी तेजी से ऊपर भागने लगा. शुरुआत में जो फीस महज 15,000 रुपये हुआ करती थी. छात्रों की संख्या बढ़ते ही इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया.
कोटा के टीचर्स और 'कॉर्पोरेट कोचिंग' का तड़का
साल 2018 के बाद जब छात्रों की बाढ़ आ गई, तो मोटेगावकर ने अपने बिजनेस का मॉडल बदल दिया. अब वह सिर्फ केमिस्ट्री तक सीमित नहीं रहना चाहता था. उसने फिजिक्स, बायोलॉजी, PCM और PCB के पूरे सिलेबस को अपने हाथ में लेने का फैसला किया. इसके लिए उसने राजस्थान के कोटा और देश के अन्य बड़े कोचिंग गढ़ों से नामीगिरामी शिक्षकों को लाखों रुपये के भारीभरकम पैकेज पर हायर किया. यहीं से एक साधारण सी दिखने वाली ट्यूशन क्लास ने एक कॉर्पोरेट कोचिंग फैक्ट्री का रूप ले लिया.
5 साल में 28 जिलों तक फैला 'RCC' का जाल
साल 2020 के बाद मोटेगावकर की इस कोचिंग ने 'RCC' (राधे कोचिंग क्लासेस) के नाम से ब्रैंडिंग शुरू की. पिछले 5 सालों के भीतर इस जाल ने महाराष्ट्र के करीब 28 जिलों को अपने लपेटे में ले लिया. आज ऑनलाइन और ऑफ लाइन दोनों माध्यमों को मिलाकर हर साल 25,000 से ज्यादा छात्र इस उम्मीद में यहां एडमिशन लेते हैं कि वे डॉक्टर या इंजीनियर बनेंगे.
फीस का गणित और इमारतों का साम्राज्य
यहाँ हर छात्र से 75,000 रुपये से लेकर 1,25,000 रुपये (या उससे भी अधिक) वसूले जाते हैं, जिस बंद पड़ी फैक्ट्री के गोदाम से यह काम शुरू हुआ था, आज वहां 4 से 5 मंजिला भव्य इमारतें खड़ी हैं. मोटेगावकर ने लातूर समेत महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बेशकीमती जमीनों पर बड़े बड़े सेंटर्स खड़े कर लिए.
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10 छात्रों की फीस से शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों के टर्नओवर में बदल चुका है, लेकिन कहते हैं ना कि पाप का घड़ा एक दिन जरूर भरता है. NEET पेपर लीक मामले में नाम आने और गिरफ्तारी के बाद शिवराज मोटेगावकर का यह पूरा तिलिस्म ढहने की कगार पर है. अब महाराष्ट्र के उन सभी 28 जिलों के सेंटर्स केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की रडार पर हैं, जहां 'RCC' का बिजनेस फैला हुआ था. पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि इस कोचिंग की आड़ में शिक्षा का कितना बड़ा खेल खेला जा रहा था.
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