NEET पेपर लीक केस को लेकर बड़ा खुलासा सामने आ रहा है. बताया जा रहा है कि नीट-यूजी की पहली डिजिटल कॉपी नासिक के एक गुप्त ठिकाने से बनाई गई थी, जिसे बाद में इसे बाक़ी राज्यों के सॉल्वर गिरोहों को भेजा गया. नाशिक के इस ऑपरेशन में निजी कुरियर सेवा के एक कर्मचारी की संदिग्ध भूमिका पाई गई है, जिसने कथित तौर पर सुरक्षित ट्रंक को गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही 30 मिनट के लिए एक्सेस करने की अनुमति दी थी.
यह बात अभी व्यापक रूप से सामने नहीं आई है कि नासिक में प्रश्नपत्र को सीधे फोटो खींचने के बजाय एक हाई-डेफिनिशन पोर्टेबल स्कैनर का उपयोग करके स्कैन किया गया था ताकि टेलीग्राम पर 'प्राइवेट माफिया' जैसे समूहों में स्पष्टता बनी रहे, जिसकी जांच चल रही है.
बहुत ही हाईटेक तरीके से की गई डेटा की चोरी
जांच एजेंसियां नासिक के बाहरी इलाके में एक ऐसे 'शैडो सर्वर' का पता लगा रही है. आशंका है कि इसी का उपयोग पेपर की इमेज होस्ट करने के लिए किया गया हो, ताकि एनटीए के AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम को चकमा दिया जा सके. सूत्रो से यह भी पता चला रहा है कि पेपर लीक के मास्टरमाइंड ने नासिक के एक छोटे आईटी स्टार्टअप की लीज लाइन का उपयोग किया था, ताकि डेटा ट्रांसफर की लोकेशन को सामान्य इंटरनेट ट्रैफिक के बीच छुपाया जा सके.
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नासिक से लीक हुए पेपर में रसायन केमिस्ट्री के 120 सवालों का एक विशिष्ट सेट था, जो वास्तविक परीक्षा से हूबहू मेल खाता था और इसे परीक्षा से लगभग 42 घंटे पहले ही तैयार कर लिया गया था. जांच अब उस 'ब्लिंड लिंक' पर केंद्रित है, जहां नासिक के एक कोचिंग संचालक ने राजस्थान के मास्टरमाइंड के साथ मिलकर लॉजिस्टिक्स चेन में सेंध लगाने की साजिश रची.
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