राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) में पार्टी संविधान में बदलाव को लेकर घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. बताया जा रहा है कि NCP के संविधान में बदलाव को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने जो स्पष्टीकरण दिया है, उससे अध्यक्ष सुनेत्रा पवार संतुष्ट नहीं हैं. पार्टी अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा है, जिसमें प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के पदों का कोई जिक्र नहीं है.
पार्टी संविधान में बदलाव विवाद की जड़
सूत्र बताते हैं कि 16 फरवरी को पार्टी के संविधान में जो बदलाव किए गए थे, वही अब विवाद की असली जड़ बन गए हैं. दावा किया जा रहा है कि 16 फरवरी को प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और बृजमोहन श्रीवास्तव ने चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर पार्टी के सभी अधिकार कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल को सौंपने की कोशिश की थी.
पटेल, तटकरे से सुनेत्रा पवार खफा
बताया जाता है कि इसे लेकर सुनेत्रा पवार ने प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के प्रति खुलकर नाराजगी जाहिर की. 10 मार्च को सुनेत्रा पवार ने चुनाव आयोग को पत्र भेजकर पार्टी के बदले हुए संविधान को अवैध घोषित कर दिया. उन्होंने आयोग से अनुरोध किया था कि पटेल और तटकरे द्वारा किए गए पिछले सभी पत्राचारों को अमान्य माना जाए और उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाए.
नेताओं की सफाई सुनेत्रा ने ठुकराई
पार्टी में बढ़ते तनाव को देखते हुए सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, धनंजय मुंडे और हसन मुश्रीफ ने सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार से मुलाकात की और संविधान में किए गए बदलावों पर अपना पक्ष रखा. सूत्रों के अनुसार, नेताओं की तरफ से बैठक में दी गई दलीलों से सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं. इससे पार्टी के भीतर दोनों गुटों के बीच संशय और नकारात्मकता का माहौल बन गया है.
पार्टी संविधान में बड़े बदलाव!
खबरें थीं कि राष्ट्रवादी कांग्रेस के नए संविधान से पार्टी के मूल स्तंभ जैसे ओबीसी और अल्पसंख्यक सेल गायब कर दिए गए हैं. पहले 7 फ्रंटल सेल हुआ करते थे, जिन्हें घटाकर केवल 4 कर दिया गया था. इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भी हड़कंप की स्थिति है.
अंदरूनी पत्र लीक होने से नाराजगी
पार्टी में इस बात को लेकर संशय बढ़ गया है कि आखिर किसके कहने पर पार्टी के संविधान में बदलाव किए गए थे? ऐसी चर्चा है कि 16 फरवरी के संशोधित संविधान में प्रफुल्ल पटेल को काफी अधिकार दे दिए गए थे, जिससे विवाद गहरा गया. वहीं पार्टी के आंतरिक पत्र के लगातार लीक होने को लेकर भी तटकरे और पटेल काफी नाराज बताए जा रहे हैं.














