'कॉर्पोरेट जिहाद' निकला तो जड़ तक जाएंगे, CM फडणवीस बोले- धर्मांतरण बर्दाश्त नहीं, NCW टीम भी पहुंची नासिक

Nashik TCS Sexually Harassment and Conversion Case: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि धार्मिक धर्मांतरण बर्दाश्त नहीं होगा. उन्होंने कहा- "अगर यह 'कॉर्पोरेट जिहाद' के रूप में सामने आता है तो हम इसकी जड़ का पता लगाएंगे.

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सीएम देवेंद्र फडणवीस ने दी चेतावनी.

Maharashtra CM on TCS Case: महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के ऑफिस से सामने आए यौन उत्पीड़न और जबरन धार्मिक परिवर्तन मामले ने देश को हिला कर रख दिया है. मामले की जांच में केंद्रीय सुरक्षा एजेसियां, पुलिस और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की भी टीमें भी जुटी हुई हैं. इसके अलावा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सख्त लहजे में कहा कि धार्मिक धर्मांतरण से जुड़े मामले में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. इसके अलावा सीएम ने यह भी कहा कि अगर यह 'कॉर्पोरेट जिहाद' (Crporate Jihad) निकलता है तो हम इसकी जड़ तक का पता लगाएंगे.

सीएम ने कहा कि अधिकारियों ने गहन जांच शुरू कर दी है, जिसने टेक हब को अपनी चपेट में ले लिया है. उन्होंने कहा, "नासिक TCS में जो घटना हुई है, वह बहुत गंभीर मामला है. मैं TCS को इस मामले का संज्ञान लेने के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा. TCS प्रमुख ने इसकी निंदा की है और वे पुलिस के साथ सहयोग कर रहे हैं. हम घटना की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. हम मामले की जांच कर रहे हैं. अगर यह 'कॉर्पोरेट जिहाद' के रूप में सामने आता है तो हम इसकी जड़ का पता लगाएंगे."

CM ने की समीक्षा बैठक

सीएम ने शनिवार को गृह विभाग की एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि धार्मिक धर्मांतरण के मामले किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे. पुलिस महानिदेशक, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, SIT प्रमुख और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में सीएम ने जांच की स्थिति के बारे में जाना.

NCW की टीम पहुंची नासिक

शहर पहुंची NCW की टीम

उधर, जांच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की टीम नासिक पहुंच गई है और TCS उत्पीड़न मामले की जांच शुरू कर दी है. रिटायर जज और पूर्व IPS की चार सदस्यीय टीम घटनास्थल का करेगी दौरा और 10 दिनों में केंद्र को रिपोर्ट सौंपेगी. आयोग इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है. आयोग की टीम ने शनिवार को नासिक पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर अब तक की जांच और घटना की विस्तृत जानकारी लेगी. टीम यह सुनिश्चित करेगी कि जांच सही दिशा में चल रही है या नहीं और क्या महिलाओं की सुरक्षा के लिए तय नियमों का पालन किया गया है. सूत्रों के अनुसार, टीम अशोक खरात मामले से जुड़ी जानकारियों को भी साझा करने और उसकी समीक्षा करने की संभावना रखती है. सभी तथ्यों और साक्ष्यों का जायजा लेने के बाद, महिला आयोग की यह टीम अगले 10 दिनों के भीतर केंद्र सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगी.

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ATS भी जांच में जुड़ी

महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) भी मामले में की जांच कर रहा है. एटीएस ने शुक्रवार को दो आरोपियों सफी शेख और रजा मेमन को हिरासत में ले लिया, जिनसे कथित जबरन धर्मांतरण मामले के सिलसिले में आरोपियों से पूछताछ की जा रही है.

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अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार, निदा खान फरार

यौन शोषण और धर्मांतरण मामले में अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन निदा खान फरार है. यह सभी आरोपी टीसीएस के ही कर्मचारी हैं. पुलिस ने बताया कि सभी आरोपी दफ्तर में उच्च पदों पर तैनात हैं. यह सभी एक सिंडिकेट की तरह काम कर रहे थे. सभी ऑफिस में युवतियों को निशाना बनाते थे. इस पूरे सिंडिकेट का खुलासा तब हुआ, जब पुलिस की एक टीम ने सफाईकर्मी बनकर टीसीएस के ऑफिस में अंडरकवर ऑपरेशन चलाया.

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निदा खान

ये हैं गिरफ्तार आरोपी

  • दानिश एजाज शेख
  • तौसिफ बिलाल अत्तर
  • रजा रफीक मेमन
  • शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी
  • मोहम्मद शफी शेख
  • आसिफ आलम आफताब आलम अंसारी
  • निदा एजाज खान (फरार)
  • अश्विनी अशोक चेनानी

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40 दिन तक अंडरकवर ऑपरेशन से जुटाई जानकारी

पुलिस के 7 सदस्यी ऑपरेशन टीम में एक महिला अधिकारी और 6 महिला कॉन्स्टेबल शामिल थीं. इस साल फरवरी में जब एक पीड़ित युवती देओलाली पुलिस थाने पहुंची और टीसीएस के अंदर चल रहीं गतिविधियों के बारे में बताया. इसके बाद नासिक पुलिस ने सबूत जुटाने, सिंडिकेट के बारे में पता करने और काम करने के तौर-तरीकों के बारे में जानने के लिए एक अंडरकवर ऑपरेशन (Nashik Police Undercover Operation)  चलाया.

पुलिस की पूरी टीम ऑफिस के हर फ्लोर सहित प्रतिबंधित क्षेत्रों तक पहुंच गई थी और वहां से जानकारी जुटानी शुरू कर दी. यह टीम टीसीएस के सीनियर कर्मचारियों, ऑफस के माहौल, वहां रोजाना होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी थी और हर दिन का अपडेट पुलिस को भेजा जाता था. इसके अलावा ऑपिस में होने वाले "अनौपचारिक" समारोहों पर नजर रखी थी, ताकि यह जानकारी जुटाई जा सके कि  दफ्तर के समय के दौरान धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा था.

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अंडरकवर ऑपरेशन के दौरान जुटाए सबूतों के आधार पर पुलिस ने 25 मार्च को पहली FIR दर्ज की. धीरे-धीरे और भी पीड़ित सामने आए. अब तक 9 FIR दर्ज हो चुकी हैं. सातों आरोपियों के फोन रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. पुलिस इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाना चाहती है. इस केस में आतंकवाद और विदेशी फंडिंग की भी जानकारी मिली है तो केंद्रीय एजेंसी के साथ महाराष्ट्र एटीएस भी जांच कर रही है.

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