Nashik TCS Case: महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धर्मांतरण के प्रयासों के मामले में जिला सत्र न्यायालय ने पांचों मुख्य आरोपियों को करारा झटका दिया है. अदालत ने अश्विनी चेनानी, रजा मेनन, आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी और तौसिफ अत्तर की जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए उन्हें फिलहाल जेल में ही रखने का आदेश सुनाया है.
पीड़िता ने जज के सामने व्यथा सुनाई
इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में उस वक्त बेहद भावुक माहौल बन गया जब एक पीड़िता ने स्वयं न्यायधीश के सामने अपनी व्यथा सुनाई. पीड़िता ने बताया कि आरोपियों का आतंक और दबाव इतना अधिक था कि उसकी दो साथी युवतियां खौफ के मारे नासिक शहर छोड़कर भागने पर मजबूर हो गईं. पीड़िता ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि उन्होंने आरोपी अश्विनी चेनानी से इस प्रताड़ना की कई बार शिकायत की थी, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. इसी उपेक्षा के कारण आरोपियों के हौसले बढ़े और आज स्थिति यह है कि पीड़ित लड़कियां अपनी ड्यूटी पर जाने से भी कतरा रही हैं.
जमानत का पुरजोर विरोध
सरकारी पक्ष की ओर से विशेष सरकारी वकील एड. विजय गायकवाड ने जमानत का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने अदालत को बताया कि मामले की एक आरोपी निदा खान पहले ही फरार हो गई थी, जिसे पकड़ने में पुलिस को 40 दिन का समय लगा. यदि इन बाकी पांचों आरोपियों को रिहा किया गया, तो इनके भी फरार होने की प्रबल आशंका है. एड. गायकवाड ने दलील दी कि अश्विनी चेनानी ने शिकायतों को दबाकर अन्य आरोपियों को शह दी. कोर्ट ने सरकारी पक्ष की दलीलों और पीड़िता के बयान की गंभीरता को समझते हुए पांचों आरोपियों को राहत देने से इनकार कर दिया. फिलहाल सभी आरोपी नासिक सेंट्रल जेल में बंद हैं.
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