मुंबई में शातिर गैंग की नई तिकड़म, सीधे रकम निकालने की बजाय पेट्रोल पंपों के जरिए कैश में बदले रहे ठगी के पैसे

सर जेजे मार्ग पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 23 साल के राहुल कुमार शैतानमल सेन को गिरफ्तार किया है, जो राजस्थान के पाली का रहने वाला है. राहुल इस रैकेट में "कैश कन्वर्जन एजेंट" की भूमिका निभा रहा था, यानी ठगी के पैसे को नकद में बदलने का जिम्मा उसी के पास था.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins

मुंबई में साइबर ठगी का एक नया और बेहद चालाक तरीका सामने आया है, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया है. अब ठग सीधे पैसे निकालने के बजाय उसे कई बैंक खातों में घुमाकर पेट्रोल पंप के जरिए नकद में बदल रहे हैं. इस पूरे खेल का खुलासा सर जेजे मार्ग पुलिस ने किया है, जहां एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है.

क्या है पूरा मामला?

पुलिस ने 23 साल के राहुल कुमार शैतानमल सेन को गिरफ्तार किया है, जो राजस्थान के पाली का रहने वाला है. जांच में सामने आया कि राहुल इस रैकेट में “कैश कन्वर्जन एजेंट” की भूमिका निभा रहा था। यानी ठगी के पैसे को नकद में बदलने का जिम्मा उसी के पास था।

इस केस में पुलिस ने अन्य संदिग्धों आफताब सय्यद, मोहम्मद शादाब खान, अब्दुल कादीर, अमित मिश्रा और सनोज उर्फ पिंटू सिंह को पूछताछ के बाद नोटिस देकर छोड़ दिया है, लेकिन अभी भी सभी जांच के दायरे में हैं.

ठगी का नया फॉर्मूला

पुलिस के अनुसार, गिरोह पहले ऑनलाइन फ्रॉड के जरिए लोगों से पैसे ऐंठता था. इसके बाद उस रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय कई अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता, ताकि उसका असली स्रोत छिपाया जा सके.

Advertisement

फिर असली खेल शुरू होता. यह रकम पेट्रोल पंप के खातों में भेजी जाती, जहां से इसे कैश में बदला जाता था.

कैसे होता था “कैश आउट”?

गिरोह के सदस्य पेट्रोल पंप पर एक खास तरीका अपनाते थे. वे ग्राहकों से नकद पैसे लेते और उसी के बराबर रकम बैंक खातों में जमा कर देते. बाहर से यह सामान्य ट्रांजैक्शन लगता, लेकिन असल में यह ठगी के पैसे को “साफ” करने का तरीका था. यानी डिजिटल फ्रॉड का पैसा धीरे-धीरे कैश में बदलकर नेटवर्क के अलग-अलग लोगों तक पहुंचा दिया जाता था.

Advertisement

कमीशन पर चलता था पूरा रैकेट

इस नेटवर्क में हर किसी की अलग जिम्मेदारी तय थी. कोई फर्जी या किराए के बैंक अकाउंट उपलब्ध कराता, कोई पैसे को अलग-अलग खातों में घुमाता तो कोई पेट्रोल पंप पर नकदी संभालता. हर काम के बदले कमीशन मिलता था, जिससे यह पूरा सिस्टम लगातार चलता रहता था.

आरोपी के पास क्या मिला?

पुलिस ने राहुल सेन के पास से 47 हजार रुपये नकद, कई मोबाइल फोन और बैंक ट्रांजैक्शन से जुड़े अहम सबूत बरामद किए हैं. मोबाइल की जांच में अन्य आरोपियों से संपर्क के पुख्ता सबूत भी मिले हैं, जिससे इस नेटवर्क के और बड़े होने के संकेत मिले हैं.

आगे क्या?

पुलिस ने फिलहाल अलग-अलग बैंक खातों में जमा 74 हजार रुपये फ्रीज कर दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के तार सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूसरे शहरों और राज्यों तक जुड़े हो सकते हैं.

Featured Video Of The Day
US Iran War: जंग के बीच पुराना इंटरव्यू शेयर कर Trump ने ईरान को ये धमकी इशारा | BREAKING News