Mumbai News: मुंबई के नागरिक प्रशासन में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां करीब 87,347 फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया है. जांच में पता चला है कि ये प्रमाणपत्र कथित तौर पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के नाम पर बनाए गए, जिससे सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. यह खुलासा BMC के हेल्थ डिपार्टमेंट की जांच में हुआ, जिसने पूरे मामले की गंभीरता को उजागर किया.
जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड में हेरफेर
जांच में सामने आया कि मेडिकल हेल्थ ऑफिसर्स (MHOs) ने नियमों का उल्लंघन करते हुए आधिकारिक Civil Registration System (CRS) पोर्टल का इस्तेमाल नहीं किया. इसके बजाय, उन्होंने पुराने SAP-CPWM सिस्टम का उपयोग कर जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड में हेरफेर किया. यह सीधे तौर पर Registrar General of India द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, जिससे सिस्टम में बड़े स्तर पर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है.
नगर आयुक्त को सौंपी गई रिपोर्ट
आंकड़ों के मुताबिक, 2024 से 2026 के बीच कुल 87,347 फर्जी एंट्री की गईं. साल 2024 में 30,507 मामले सामने आए, जो 2025 में बढ़कर 49,705 हो गए, जबकि 2026 में अब तक 7,135 केस दर्ज किए गए हैं. इस पूरे मामले की रिपोर्ट हाल ही में नगर आयुक्त अश्विनी भिडे को सौंपी गई है, BMC ने सभी वार्ड्स में जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन का व्यापक ऑडिट कराने का फैसला लिया है.
क्लर्क्स को किया गया सस्पेंड
इसके साथ ही पूरे शहर में सिविक विजिलेंस डिपार्टमेंट को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि घोटाले की पूरी परतें खोली जा सकें. रिपोर्ट की सिफारिशों के अनुसार, 24 वार्ड्स में MHOs का चरणबद्ध तबादला किया जाएगा, ताकि सिस्टम में पारदर्शिता लाई जा सके. पहले चरण में अंधेरी (K West), दहिसर (R North) और भायखला (E Ward) के अधिकारियों के तबादले की तैयारी है. इससे पहले BMC ने M/East वार्ड में 2 MHOs और 2 क्लर्क्स को सस्पेंड किया था और 237 फर्जी प्रमाणपत्र रद्द किए गए थे. साथ ही कुर्ला (L Ward) और भायखला (E Ward) में भी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है.
इस मामले को लेकर बीजेपी नेता किरिट सोमैया ने आज़ाद मैदान पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है. सोमैया ने चेतावनी दी है कि अगर 7 दिनों के भीतर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो वे बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करेंगे.
कैसे हुआ मामले का खुलासा?
बता दें कि यह मामला उस समय सामने आया है, जब मुंबई में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की पहचान के लिए अभियान चलाया जा रहा था. फरवरी में मेयर बनने के बाद रीतु तावड़े ने अवैध घुसपैठियों और फेरीवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे. अब इस पूरे घोटाले के सामने आने के बाद, मुंबई के नागरिक सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.
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