पारा @46°; आग उगल रहा सूरज, स्कूलों का टाइम भी बदला, महाराष्ट्र में क्यों विलेन बन रही गर्मी, जान लीजिए वजह

महाराष्ट्र में केवल तीन जिले यानी सातारा, धाराशिव तथा कोल्हापुर ही ऐसे हैं जहां तापमान 39-40 डिग्री के करीब है.खासतौर पर प्रभावित विदर्भ क्षेत्र है जहां कुछ हिस्सों, विशेष रूप से अकोला में रविवार 26 अप्रैल को अधिकतम तापमान 46.9°C तक पहुंच गया है.

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  • महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में अप्रैल के अंत तक तापमान 46 डिग्री से ऊपर पहुंचा, भीषण गर्मी का अनुभव
  • अकोला में 46.9 डिग्री तापमान दर्ज किया गया जो इस सीजन में सबसे अधिक और औसत से चार डिग्री अधिक है
  • अकोला, अमरावती, वर्धा के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी,दोपहर में धूप से बचने और हाइड्रेटेड रहने की सलाह
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मुंबई:

अप्रैल का महीना अपने अंत की ओर है और गर्मी का प्रचंड रूप लोगों का जीना मुहाल किए हुए है. गर्मी के इस तेवर से महाराष्ट्र भी नहीं बच पाया है. अकोला, अमरावती, वर्धा समेत कई शहरों का तापमान 46 डिग्री के पार जा रहा है. महाराष्ट्र में केवल तीन जिले यानी सातारा, धाराशिव तथा कोल्हापुर ही ऐसे हैं जहां तापमान 39-40 डिग्री के करीब है.खासतौर पर प्रभावित विदर्भ क्षेत्र है जहां कुछ हिस्सों, विशेष रूप से अकोला में रविवार 26 अप्रैल को अधिकतम तापमान 46.9°C तक पहुंच गया है.विदर्भ के कई जिलों में तापमान 45°C से ऊपर दर्ज किया जा रहा है, जिसके कारण भीषण गर्मी के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया गया है.

अकोला में 47 के करीब पहुंचा पारा 

अकोला में 46.9°C तापमान दर्ज किया गया, जो इस सीजन के उच्चतम तापमानों में से एक है.विदर्भ में सबसे भीषण गर्मी का अनुभव किया जा रहा है, जहां अधिकांश जिलों में तापमान 40°C से 45°C के पार पहुंच गया है. इस क्षेत्र में लू की स्थिति 29 अप्रैल तक बने रहने की संभावना है. हालांकि अकोला में कुछ घंटे आसमान में बादल छाए रहे तब भी तापमान लगभग 47 के करीब पहुंच गया. कुछ लोगों ने इस अवसर पर सड़क पर ऑमलेट और डोसा बनाकर तपती धूप की सच्चाई सामने लाई है.

कहां-कितना तापमान?

➔विदर्भ में अकोला में सर्वाधिक 46.9°C तापमान दर्ज किया गया. वहां के तापमान में शनिवार की तुलना में 1.3°C की वृद्धि हुई, जो औसत से 4.3°C अधिक है.
➔अमरावती में 46.8°C तापमान दर्ज किया गया और वहां 1.2°C की वृद्धि हुई है, जो औसत से 4.6°C अधिक है.
➔वर्धा शहर में 46.4°C तापमान दर्ज किया गया, जो औसत से 3.8°C अधिक है
➔यवतमाल में रविवार के दिन तापमान में सर्वाधिक 3°C बढ़कर 46.0°C पर पहुंच गया जो औसत से 4.6°C अधिक है.
➔नागपुर का तापमान 45.4°C दर्ज किया गया और उसमें 1.2°C की वृद्धि हुई है. IMD के फॉरकास्ट में ऐसा बताया गया था कि नागपुर में आगामी मंगलवार-बुधवार के दिन तापमान 45 को छुएगा। लेकिन, यह रविवार को ही हो गया.
➔चंद्रपुर में 45.0°C तापमान दर्ज किया गया, जो औसत से 2.3°C अधिक है.
➔गडचिरोली और वाशिम इन दोनों शहरों में 44.6°C तापमान दर्ज किया गया है.
➔गोंदिया में 44.4°C तापमान के साथ औसत से 2.5°C की वृद्धि देखी गई है
➔ब्रह्मपुरी में 44.2°C और भंडारा में 44.0°C तापमान दर्ज किया गया.
➔ जो विदर्भ के पश्चिमी इलाके में आखिरी जिला है तथा मराठवाड़ा से सटा है, वहां 43.5°C तापमान दर्ज किया गया, जो औसत से 3.8°C अधिक है.

क्यों ऊबल रहा महाराष्ट्र?

मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ प्रवीण कुमार के अनुसार इसके पीछे के कारण तीन चार मौसम की प्राकृतिक स्थितियां हैं जिनके चलते अप्रैल महीने में ही तापमान कई वर्षों बाद ऐसे बढ़ा है. अमूमन ये स्थिति मई माह में देखी जाती है.लिहाजा, नयापन लग रहा है लेकिन ऐसे पहले भी हुआ है.मध्य भारत के लिए यह कुछ नया नहीं है.

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 स्वास्थ्य को लेकर जारी हुई एडवायजरी 

अकोला, अमरावती और वर्धा के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. एहतियाती उपाय के तौरपर स्थानीय अधिकारियों ने दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच सीधे धूप के संपर्क में आने से बचने, हाइड्रेटेड रहने (पानी पीते रहने) और सुरक्षात्मक साधनों (टोपी, गीला कपड़ा) का उपयोग करने की सलाह दी है.जाहिर है, ऐसी स्थितियों में विशेषतः लू के कारण होने वाली बीमारियों, जैसे हीटस्ट्रोक (लू लगना) का उच्च स्वास्थ्य जोखिम है. अस्पतालों में सन स्ट्रोक से पीड़ितों के लिए विशेष सुविधाएं की गई हैं.खास तौरपर बच्चों के लिए विशेष ध्यान देने की आवश्यकता डॉक्टर्स बता रहे हैं.

इधर नागपुर जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों को साढ़े दस बजे छुट्टी देने के निर्देश जारी कर दिए हैं,लेकिन जानकार इसे अपर्याप्त बताते हैं. पीडियाट्रिशियन डॉ शिल्पा हजारे ने एनडीटीवी को बताया कि स्कूल को जल्दी छुट्टी दिलान के बाद भी परेशानी कम नहीं हुई है और बच्चों को तेज सरदर्द, सुस्त लगना जैसी समस्याएं हो रही हैं. स्कूलों को अवकाश देकर ऑन लाइन क्लासेज का पर्याय ढूंढने की आवश्यकता है.क्योंकि, नई व्यवस्था में बच्चों को घर पहुंचने में बारह बज रहे हैं जबकि तापमान चरम पर चढ़ने लगता है. ग्रामीण इलाकों में कई स्थानों पर बच्चों को पेड़ के किनारे या किसी शेड में घंटों धूप में बस का इंतजार करते देख जा सकता है.ऐसे में तेज हवा या लू लगने की अधिक संभावना बन जाती है.
 

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