उद्धव पर फडणवीस ने की तारीफों की बौछार, शिंदे को इशारा या बदल रही महाराष्ट्र की सियासी हवा

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में देवेंद्र फडणवीस और उद्धव ठाकरे के बीच बढ़ती नजदीकियों ने नए सियासी समीकरणों की चर्चा छेड़ दी है. विधान परिषद में फडणवीस की तारीफ और उद्धव ठाकरे के नरम रुख ने महायुति और MVA दोनों गठबंधन की धड़कनें बढ़ा दी हैं. जानें बंद कमरे की बैठक और बदलते घटनाक्रमों के पीछे का असली सच.

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  • देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे के विधान परिषद सदस्य कार्यकाल समाप्ति पर उनके नेतृत्व खुले दिल से प्रशंसा की
  • उद्धव ठाकरे ने फडणवीस के संबोधन का आभार व्यक्त करते हुए राजनीति में संवाद और राज्यहित को सर्वोपरि बताया है
  • फडणवीस, ठाकरे और आदित्य ठाकरे के बीच बंद कमरे में हुई बैठक में विधायकों को विकास फंड पर आश्वासन दिया गया
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Fadnavis Uddhav Meeting: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों जो कुछ घट रहा है, वह किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग रही है. विधान परिषद में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा उद्धव ठाकरे की खुलकर की गई तारीफ और उसके जवाब में उद्धव ठाकरे के नरम रुख ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. मई में उद्धव ठाकरे का विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्यकाल खत्म हो रहा है. इस मौके पर दोनों नेताओं के बीच जो तालमेल दिखा, उसे जानकार केवल शिष्टाचार नहीं बल्कि भविष्य के संकेतों के तौर पर देख रहे हैं.

विदाई भाषण: सियासत से परे सम्मान

मई महीने में Uddhav Thackeray का विधान परिषद सदस्य के रूप में कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है. इस मौके पर मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने अपने संबोधन में ठाकरे के नेतृत्व, प्रशासनिक अनुभव और संयमित राजनीति की सराहना की. फडणवीस ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने कठिन समय में राज्य का नेतृत्व किया और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उनकी कार्यशैली में संतुलन और संवाद की भावना दिखाई देती है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लोकतंत्र में संवाद और सहयोग आवश्यक है, भले ही विचारधारा अलग हो. उन्होंने कहा कि 'उद्धव जी के स्वभाव में राजनीति थोड़ी कम है. उनका व्यक्तित्व एक राजनेता जैसा नहीं है, इसलिए कई बार उनके लिए गए निर्णयों से अलग तरह की परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं. यह गुण उन्हें बालासाहेब से विरासत में मिला है एक बार जो तय कर लिया, वह निर्णय ले लेना.'

"हाथ पकड़ कर चलना था, बात पकड़ लिया"

फडणवीस ने कहा, 'वह एक फोटोग्राफर हैं. उन्होंने महाराष्ट्र की विभिन्न छटाओं को अपने कैमरे में कैद किया है. उनके काम में महाराष्ट्र की संस्कृति के प्रति उनका प्रेम झलकता है. वारी की फोटोग्राफी के लिए उन्होंने हेलीकॉप्टर से रिस्क लेकर अपना शौक पूरा किया.' उन्होंने आगे कहा कि 'शब्दों के धनी की उपमा उद्धव ठाकरे जी को दूंगा.' उन्होंने कहा कि 'उनका मूल स्वभाव रिश्ते निभाने का है. हम, जो कभी साथ थे, 2019 में अलग हो गए।  "जिनको मेरा हाथ पकड़ कर चलना था, वो बात पकड़ कर बैठ गए.." यह बात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कही।

उद्धव ठाकरे का जवाब: संकेत या शिष्टाचार?

अपने जवाब में Uddhav Thackeray ने भी मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया और कहा कि राजनीति में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन राज्यहित सर्वोपरि होना चाहिए. ठाकरे ने यह भी कहा कि “अगर संवाद कायम रहे, तो कई समस्याओं का समाधान निकल सकता है.” उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक एक “सॉफ्ट सिग्नल” के रूप में देख रहे है. ठाकरे ने उन्हें इतने करीब से जानने के बाद मज़ाक में फडणवीस से कहा, "ऐसी कौन सी बात थी कि और किसी का हाथ पकड़ना पड़ा.."

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बंद दरवाजे की बैठक: क्या हुआ अंदर?

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis, Uddhav Thackeray और Aaditya Thackeray के बीच विधान परिषद के सभापति Ram Shinde के कक्ष में बंद दरवाजे के पीछे महत्वपूर्ण चर्चा हुई है. इस बैठक में मुख्य मुद्दा था — विधायकों को फंड न मिलना. सूत्र बताते हैं कि उद्धव ठाकरे के सामने कई विधायकों ने अपनी नाराजगी जताई कि उन्हें विकास कार्यों के लिए पर्याप्त निधि नहीं मिल रही. इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने आश्वासन दिया कि सभी विधायकों को आवश्यक फंड उपलब्ध कराया जाएगा. यह आश्वासन राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.  

महायुति में दरार?

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ महायुति (BJP–शिंदे गुट) में मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं. Eknath Shinde के नेतृत्व वाली शिवसेना और बीजेपी के बीच सातारा जिला परिषद चुनाव के बाद तनाव बढ़ा है. कई मुद्दों पर शिंदे गुट की नाराजगी सामने आई है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें धीरे-धीरे हाशिए पर डाला जा रहा है? सातारा SP के निलंबन को लेकर दोनों पार्टी के बीच आक्रामकता साफ देखने को मिली.

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Devendra Fadnavis और Uddhav Thackeray के बीच बढ़ती संवादशीलता को अभी सीधे गठबंधन की दिशा में कदम नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह निश्चित रूप से राजनीतिक संभावनाओं के दरवाजे खुलने का संकेत है. आने वाले महीनों में — खासकर मई में उद्धव ठाकरे के कार्यकाल समाप्त होने के बाद — यह साफ हो सकता है कि यह केवल शिष्टाचार की राजनीति थी या महाराष्ट्र में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत.

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