महाराष्ट्र: चुनाव से पहले ही बीजेपी की जीत, कल्याण-डोंबिवली और पनवेल में 3 उम्मीदवार निर्विरोध विजयी

महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनाव होने में अभी कुछ वक्त है लेकिन बीजेपी ने तीन सीटों पर निर्विरोध चुनाव जीत लिया है. कल्याण से अमजद खान और नवी मुंबई से राहुल कांबले की रिपोर्ट.

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  • महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी ने तीन सीटों पर बिना किसी विरोध के जीत दर्ज की
  • कल्याण-डोंबिवली और पनवेल में बीजेपी के तीन कैंडिडेट ने चुनाव जीत लिया है
  • ​पनवेल में नितिन पाटिल की निर्विरोध जीत हुई है, चुनाव प्रचार ने अब जोर पकड़ लिया है
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मुंबई:

​महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों का बिगुल बज चुका है, लेकिन रिजल्ट से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना खाता खोल लिया है. कल्याण-डोंबिवली (KDMC) और पनवेल महानगरपालिका चुनाव में बीजेपी के कुल 3 उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत हासिल कर विरोधियों को चौंका दिया है.

​कल्याण-डोंबिवली में खिला 'कमल'

प्रचार अभियान जोर पकड़ने से पहले ही कल्याण-डोंबिवली में बीजेपी की दो महिला उम्मीदवारों ने बाजी मार ली है. डोंबिवली से आसावरी केदार नवरे और कल्याण से रेखा चौधरी निर्विरोध निर्वाचित हुई हैं. आसावरी नवरे ने पैनल क्रमांक 26 (C) से सामान्य वर्ग में नामांकन भरा था, जहां उनके खिलाफ कोई अन्य आवेदन न आने के कारण उन्हें विजयी घोषित किया गया. वहीं, रेखा चौधरी ने पैनल क्रमांक 18 (A) से अपनी जीत दर्ज की है.

​पनवेल में नितिन पाटिल की निर्विरोध जीत

पनवेल महानगरपालिका में भी बीजेपी को बड़ी सफलता मिली है. प्रभाग क्रमांक 18 (B) से नितिन पाटिल निर्विरोध नगरसेवक चुने गए हैं. इस प्रभाग में 'शेतकरी कामगार पक्ष' (PWP) के उम्मीदवार का नामांकन पत्र जांच के दौरान रद्द हो गया, जिससे नितिन पाटिल चुनावी मैदान में अकेले रह गए और उनकी जीत का रास्ता साफ हो गया.

​KDMC चुनाव के नए समीकरण

कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका की कुल 122 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में इस बार समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं. महायुति और महाविकास अघाड़ी के बीच सीधी टक्कर होने वाली है. महायुति: शिवसेना (शिंदे गुट) 66 सीटों पर और बीजेपी 56 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. उधर, अजित पवार गुट महायुति से बाहर होकर 42 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रहा है.

विपक्ष में राज ठाकरे की मनसे (MNS) और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) मिलकर चुनाव मैदान में हैं. मनसे 54 सीटों पर, जबकि शिवसेना (UBT) 68 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रही है. सीटों के बंटवारे के बाद अब दोनों ही गुटों के सामने बागी उम्मीदवारों को शांत करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
 

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