- उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एनसीपी के दोनों गुटों के विलय और एक साथ आने की अटकलों को पूरी तरह खारिज किया.
- ईवीएम पर सवाल उठाने वालों के बारे में उन्होंने कहा कि हार के बाद अक्सर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं.
- अजित पवार ने हार को स्वीकार करते हुए कहा कि हार से हार मानना गलत है और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
महाराष्ट्र चुनाव परिणामों में भाजपा को जहां रिकॉर्ड‑तोड़ जीत मिली, वहीं अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के लिए यह नतीजे किसी बड़े झटके से कम नहीं रहे हैं. नतीजों के तुरंत बाद शरद पवार और अजित पवार की मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में एक बार फिर दोनों गुटों के साथ आने की चर्चाओं को हवा दी, लेकिन अब अजित पवार ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कहा है कि ऐसी किसी भी बातचीत की शुरुआत ही नहीं हुई. उन्होंने पार्टी की करारी हार, आगे की रणनीति, भाजपा की सफलता और ईवीएम को लेकर उठने वाले सवालों पर खुलकर अपनी बात रखते हुए यह संकेत भी दिया कि हार के बावजूद वे पीछे हटने वाले नहीं हैं और संगठन को मजबूत करने की कोशिश जारी रहेगी.
NCP के दोनों गुटों के फिर से एक साथ आने और विलय की अटकलों को लेकर उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने बारामती में कहा कि दोनों NCP गुटों के एक साथ आने को लेकर ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई है. विश्वविद्यालय के कुलपति आए थे और मुझे यह संदेश मिला था कि दोनों को एक साथ ही उद्घाटन के लिए चलना है, इसलिए मैं वहां गया था. चुनाव परिणाम आने के बाद शरद पवार से मिले थे, जिसके बाद दोनों गुटों के साथ आने को लेकर अटकलें लगने लगी थी.
सुप्रिया सुले से मुलाकात हुई, क्या बात हुई?
उधर, बारामती के शारदानगर स्थित एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट के कृषि प्रदर्शनी में पूरा पवार परिवार एक बार फिर साथ नजर आया. इस कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक चर्चा उपमुख्यमंत्री अजित पवार और सांसद सुप्रिया सुले की मुलाकात को लेकर रही. कृषि प्रदर्शनी के परिसर में स्थित इनक्यूबेशन सेंटर में दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में काफी देर तक चर्चा हुई. राजनीतिक गलियारों में इस 'बंद द्वार' चर्चा को पवार परिवार के बीच बढ़ते मनोमिलन और भविष्य की नई रणनीतियों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.
स्थानीय स्तर पर लिए जाते हैं फैसले: अजित पवार
अजित पवार ने इसे लेकर कहा, "स्थानीय निकाय चुनावों में अधिकार स्थानीय स्तर पर दिए जाते हैं और निर्णय भी वहीं लिए जाते हैं. हम परिवार के तौर पर एक साथ हैं.”
साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में पहले स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी तक चुनाव कराने का निर्देश दिया था, लेकिन अब 15 फरवरी तक की अनुमति मिल गई. मेरे जिले में जिला परिषद के चुनाव हैं, वहां की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए स्थानीय नेता ही फैसला लेंगे.
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ईवीएम पर सवाल और भाजपा की जीत पर भी बोले
इस दौरान अजित पवार ने ईवीएम पर सवाल उठाने वालों को लेकर कहा कि मुझे इस बारे में अभी कुछ नहीं कहना है. अक्सर हार होने पर ही ऐसे आरोप लगाए जाते हैं. हो सकता है कि कोई एक उम्मीदवार बोल रहा हो, लेकिन 29 जगहों पर चुनाव हुए और हजारों लोग खड़े थे. यह लोकतंत्र है और समाचार माध्यमों को अपनी बात रखने का अधिकार है.
साथ ही भाजपा की जीत पर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता ही राजा होता है. राजनीतिक दलों का काम सिर्फ प्रयास करना है. भाजपा को जो शानदार सफलता मिली है, उसके लिए मैं उनका तहे दिल से अभिनंदन करता हूं. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा ने ये चुनाव लड़े और उन्हें बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, जबकि अन्य को हार का सामना करना पड़ा है.
अंदाज गलत साबित हुआ... हार पर बोले अजित पवार
इस दौरान उन्होंने इन चुनावों में हार और भविष्य की रणनीति को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि हार हुई है, लेकिन मेरा गणित साफ है, हार से कभी हार मानकर बैठना नहीं चाहिए, बल्कि अपना काम करते रहना चाहिए. अभी नतीजों को 24 घंटे भी नहीं हुए हैं, तड़के 3 बजे तक तो नतीजे ही आ रहे थे. हम साथ बैठेंगे, चर्चा करेंगे. हमार अंदाज गलत साबित हुआ, वैसे ही जैसे मीडिया के भी कई अंदाज गलत निकले.
महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगमों के चुनाव परिणाम सामने आ गए हैं. इन चुनावों में महायुति में शामिल भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को शानदार सफलता मिली है, लेकिन यह चुनाव उप मुख्यमंत्री अजित पवार और उनकी पार्टी के लिए किसी बुरे सदमे से कम नहीं रहा है. एनसीपी के गढ़ समझे जाने वाले पिंपरी चिंचवड़ में तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें करारा झटका लगा है.














