महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे बारामती और राहुरी विधानसभा उपचुनाव 2026 के लिए 23 अप्रैल (गुरुवार) को मतदान प्रक्रिया पूरी हो गई. शाम 5 बजे तक बारामती सीट पर 50% मतदान हुआ, वहीं अहिल्यानगर जिले की राहुरी सीट पर शाम 6 बजे तक 50.74% वोटिंग दर्ज की गई. इन दोनों सीटों पर जनता ने ईवीएम में उम्मीदवारों की किस्मत कैद कर दी है, जिसके परिणाम 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे.
बारामती उपचुनाव 2026: सुनेत्रा पवार के लिए 'औपचारिकता' बना चुनाव
पुणे जिले की बारामती विधानसभा सीट तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और राकांपा प्रमुख अजित पवार की 28 जनवरी 2026 को एक दुखद विमान दुर्घटना में मृत्यु के कारण रिक्त हुई थी. इस सीट पर उनकी पत्नी और वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मैदान में हैं. उनके खिलाफ कुल 22 अन्य उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल ने उनके सामने प्रत्याशी नहीं उतारा है.
कांग्रेस ने पहले आकाश मोरे को टिकट दिया था, लेकिन बाद में पार्टी ने उनका नाम वापस ले लिया. विपक्षी महा विकास आघाडी (MVA) द्वारा उम्मीदवार न उतारे जाने के कारण सुनेत्रा पवार की राह काफी आसान नजर आ रही है.
भावुक अपील और पवार परिवार का रुख
मतदान के बाद मीडिया से बात करते हुए सुनेत्रा पवार भावुक नजर आईं. उन्होंने कहा, "बारामती के लोग अजित दादा को श्रद्धांजलि देने के लिए भारी संख्या में बाहर निकल रहे हैं. यह चुनाव एक भावनात्मक माहौल में हो रहा है." उन्होंने वोट डालने से पहले विद्या प्रतिष्ठान कॉलेज परिसर में अजित पवार को श्रद्धांजलि भी अर्पित की, जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया गया था.
पवार परिवार की एकजुटता और मतभेद भी यहाँ स्पष्ट दिखे. अजित पवार के छोटे भाई श्रीनिवास पवार, उनकी पत्नी शर्मिला और अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने सुबह-सुबह काटेवाड़ी मतदान केंद्र पर अपना वोट डाला. हालांकि, राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार अस्वस्थ होने के कारण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हैं, जिस वजह से वे मतदान नहीं कर सके.
राहुरी उपचुनाव 2026: कर्डिले बनाम मोकाटे का मुकाबला
अहिल्यानगर जिले की राहुरी सीट पर भी माहौल गरमाया रहा. यह सीट पिछले साल अक्टूबर में भाजपा विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन से खाली हुई थी. यहाँ भाजपा ने उनके बेटे अक्षय कर्डिले को उम्मीदवार बनाया है. अक्षय का सीधा मुकाबला राकांपा (शप) के गोविंद मोकाटे और वंचित बहुजन आघाडी के संतोष चालके से है.
सुनेत्रा पवार के लिए संवैधानिक अनिवार्यता
अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने 31 जनवरी 2026 को महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. संवैधानिक नियमों के अनुसार, शपथ के 6 महीने के भीतर उन्हें विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है. ऐसे में बारामती का यह उपचुनाव उनके राजनीतिक भविष्य और पद की गरिमा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. बता दें कि वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर अजित पवार ने अपने भतीजे युगेंद्र पवार को करारी शिकस्त दी थी. अब देखना यह है कि 4 मई को बारामती की जनता किस तरह का जनादेश देती है.
बारामती उपचुनाव: पीछे हटकर भी कांग्रेस की ‘राजनीतिक जीत', 2029 के लिए बड़ी रणनीति तैयार
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)













