कर्ज के पैसे वापस मांगना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं, बॉम्बे HC का बड़ा फैसला

अदालत ने साफ किया कि अपने दिए हुए पैसे वापस मांगना किसी भी तरह से आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं है. इसी के साथ हाईकोर्ट ने इन छह लोगों के खिलाफ दर्ज मामले और आपराधिक मुकदमे को रद्द करने का आदेश दिया है. demanding Repayment of loan Does not said

विज्ञापन
Read Time: 2 mins

Bombay High Court Verdict: बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि उधार दिए गए पैसे वापस मांगना किसी को आत्महत्या के लिए उकसाना (Abetment to Suicide) नहीं माना जा सकता. बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एक शिक्षक की आत्महत्या के मामले में आरोपी बनाए गए छह लोगों को बड़ी राहत दी है.

इसके बाद हाईकोर्ट ने पुलिस की चार्जशीट और दर्ज की गई एफआईआर को भी खारिज कर दिया है. इस मामले में कोल्हापुर पुलिस मुख्य आरोपी समेत छह लोगों के आरोपी बनाया था.

क्या था मामला?

पेशे से शिक्षक दिलीप मांडे ने इस मामले के याचिकाकर्ताओं से ब्याज पर कुछ पैसे उधार लिए थे. कर्ज के बीच ही दिलीप ने आत्महत्या कर ली थी. इसके बाद सितंबर 2022 में दिलीप के परिवार ने कोल्हापुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कर्ज देने वाले पैसे वसूली के लिए दिलीप को लगातार परेशान कर रहे थे. इससे तंग आकर उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली.

मामले में कोल्हापुर थाना पुलिस ने छह लोगों पर एफआईआर दर्ज की थी और मुख्य आरोपी अमित मोरे को बनाया था. जांच के बाद पुलिस ने सभी के खिलाफ (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अन्य धारा में दर्ज मामले की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट के फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है.

Advertisement

ये भी पढ़ें- शादी कोई सर्विस कॉन्ट्रैक्ट नहीं, पत्नी नौकरानी नहीं: घरेलू काम न करने पर तलाक देने से कोर्ट का इनकार

Featured Video Of The Day
पटवारी के ट्रैप होने के बाद ग्रामीणों ने बजाए ढोल और थाली