महाराष्ट्र को कमजोर करने के लिए दिल्ली ने तोड़ी शिवसेना'... ठाकरे बंधुओं ने संयुक्त इंटरव्यू में साधा निशाना

महाराष्ट्र में ठाकरे बंधुओं ने बीएमसी चुनाव के पहले संयुक्त इंटरव्यू में बीजेपी पर बड़ा निशाना साधा है. शिवसेना के बंटवारे के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के लिए करो या मरो का चुनाव है.

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Maharashtra Nikay Chunav 2026
मुंबई:

महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया और निर्णायक अध्याय खुल चुका है. करीब 20 वर्षों के राजनीतिक मतभेदों के बाद पहली बार शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे एक साथ एक मंच पर एक स्वर में बोले. BMC चुनाव के बीच सामना का यह इंटरव्यू सिर्फ दो नेताओं की बातचीत नहीं, बल्कि मुंबई और महाराष्ट्र की अस्मिता, अस्तित्व और भविष्य पर सीधा राजनीतिक घोषणापत्र बनकर सामने आया है. ठाकरे ने कहा, यह सत्ता की नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है.दोनों ठाकरे बंधुओं ने कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी, कुर्सी या पद की नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र और मुंबई को बचाने की आखिरी लड़ाई है.

उद्धव ठाकरे ने कहा, हम दो भाई साथ आए हैं, इसका मतलब है कि अब महाराष्ट्र को एकजुट होना होगा. अब भी हम बंटे रहे तो महाराष्ट्र को तोड़ने वाली ताकतें फायदा उठा लेंगी. राज ठाकरे ने कहा, आज सवाल हमारा नहीं, पूरे महाराष्ट्र के समाज के अस्तित्व का है. यह ‘अभी नहीं तो कभी नहीं' का क्षण है. 'मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश' इंटरव्यू का सबसे तीखा हमला मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की कथित साजिश पर रहा.

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राज ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि आज केंद्र और राज्य में वही ताकतें सत्ता में हैं, जो पहले भी मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करना चाहती थीं. अगर वही लोग मनपा में भी आ गए तो मराठी मानुस कुछ नहीं कर पाएगा. उन्होंने इस स्थिति की तुलना संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौर से की और कहा कि आज वैसा ही माहौल फिर बन रहा है.

'मराठी शासक हैं, लेकिन मालिक दिल्ली में बैठे हैं'

उद्धव ठाकरे ने कहा, भले ही शासक मराठी हों, लेकिन उनके मालिक दिल्ली में बैठे हैं. वे राज्य के लिए नहीं, ठेकेदारों और मालिकों के लिए काम कर रहे हैं. महाराष्ट्र आज ‘क्लीन चिट देने की फैक्ट्री' बन चुका है. राज ठाकरे ने इसे और तीखा बनाते हुए कहा, ये लोग बाज की तरह हैं, जो मालिक के हाथ पर बैठकर अपने ही लोगों को नोचने का काम कर रहे हैं. ठाकरे ने कहा, शिवसेना तोड़ने का उद्देश्य महाराष्ट्र को कमजोर करने का है. 

शिवसेना को तोड़ने पर नाराजगी

उद्धव ठाकरे ने शिवसेना विभाजन पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, दल-बदल राजनीति का हिस्सा है, लेकिन किसी पार्टी को खत्म कर देना, उसका चिन्ह छीन लेना, मान्यता मिटा देना. यह प्रयोग महाराष्ट्र को कमजोर करने के लिए किया गया. यह सिर्फ एक पार्टी पर हमला नहीं, बल्कि मराठी समाज की राजनीतिक ताकत तोड़ने की कोशिश करार दी गई.मुंबई की बदहाल स्थिति, प्रदूषण, ट्रैफिक और रीडेवलपमेंट पर दोनों नेताओं और महेश मांजरेकर की चिंता खुलकर सामने आई.

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उद्धव ठाकरे ने कहा, यह विकास की रफ्तार नहीं, विनाश की रफ्तार है. नियोजन शून्य विकास ने मुंबई को सांस लेने लायक भी नहीं छोड़ा. मैंग्रोव कटाई, आरे जंगल, गारगाई–पिंजाल बांध, और समुद्री जल को पीने योग्य बनाने की परियोजना को रद्द करने जैसे फैसलों को ठेकेदार हितैषी राजनीति बताया गया.

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ड्रग्स, अपराध पर भी बोले ठाकरे

ड्रग्स, अपराध और राजनीति के गठजोड़ पर दोनों नेताओं ने गंभीर सवाल उठाए.राज ठाकरे ने कहा, राजनीति में बढ़ता पैसा और सड़कों पर फैलते ड्रग्स दोनों जुड़े हुए हैं. उद्धव ठाकरे ने कहा,यहां मुख्यमंत्री सबको क्लीनचिट दे देते हैं, लेकिन सच सामने नहीं आने देते.

लोकतंत्र पर खतरा: निर्विरोध चुनाव

बीएमसी चुनावों में उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए मजबूर करने और निर्विरोध चुनावों पर तीखी टिप्पणी हुई. ठाकरे बंधुओं ने कहा, यह लोगों का मतदान अधिकार छीनने की साजिश है.यह संयुक्त इंटरव्यू साफ संकेत देता है कि आने वाला बीएमसी चुनाव सिर्फ नगर निगम का चुनाव नहीं, बल्कि मुंबई बनाम कॉन्ट्रैक्ट, महाराष्ट्र बनाम दिल्ली नियंत्रण, मराठी अस्मिता बनाम सत्ता की राजनीति का जनमत संग्रह बनने जा रहा है.
 

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