पवार गुटों को ना, समान विचारधारा वालों को हां... महाराष्‍ट्र स्‍थानीय निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस का फैसला

मुंबई में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस ने महाराष्ट्र के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर बड़ा फैसला किया है. पार्टी ने अपने राजनीतिक स्टैंड को साफ करते हुए कहा कि वह केवल समान विचारधारा वाले दलों के साथ ही मैदान में उतरेगी. 

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  • कांग्रेस ने महाराष्ट्र के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में पवार गुटों से गठबंधन नहीं करने का निर्णय लिया है.
  • कांग्रेस केवल उन्हीं राजनीतिक दलों के साथ चनाव लड़ेगी जिनके साथ वैचारिक और राजनीतिक भरोसा स्थापित है.
  • कांग्रेस ने शिवसेना (उद्धव गुट) और वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ गठबंधन कर चुनाव में उतरने का निर्णय लिया है.
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मुंबई:

महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर करवट ले रही है और कांग्रेस ने आगामी स्‍थानीय निकाय चुनावों को लेकर बड़ा संकेत दिया है. इन चुनावों में कांग्रेस अपनी अपनी पिछली नीति पर ही कायम रहेगी. पार्टी ने साफ कर दिया है कि वो स्थानीय निकाय चुनावों में न तो अजित पवार के नेतृत्‍व वाले गुट के साथ जाएगी और न ही शरद पवार के नेतृत्‍व वाले गुट के साथ. कांग्रेस ने अब अपनी तैयारी उन साझेदारों के साथ आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जिन पर वह राजनीतिक और वैचारिक भरोसा करती है.  

मुंबई में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस ने महाराष्ट्र के आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर बड़ा फैसला किया है. राज्य की 12 जिला परिषदों और पंचायत समितियों के चुनाव करीब हैं और पार्टी ने अपने राजनीतिक स्टैंड को साफ करते हुए कहा कि वह केवल समान विचारधारा वाले दलों के साथ ही मैदान में उतरेगी. 

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एनसीपी के गुटों से नहीं होगा गठबंधन

बैठक के दौरान यह साफ शब्दों में घोषित किया गया कि कांग्रेस किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के साथ गठबंधन नहीं करेगी. इसके साथ ही पार्टी ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) से भी दूरी बनाए रखने का निर्णय लिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति कई स्तरों पर गठबंधन के सहारे है और हर दल नए समीकरण तलाश रहा है. 

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कांग्रेस ने यह भी साफ किया है कि वह शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. पार्टी के नेताओं का मानना है कि इन दलों के साथ वैचारिक तालमेल और राजनीतिक समझ पहले से मजबूत है, जिसे वे स्थानीय निकाय स्तर तक ले जाना चाहते हैं. 

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नई दिशा में जा रही है महाराष्‍ट्र कांग्रेस

इस रणनीति को महाराष्ट्र की राजनीति में कांग्रेस की नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी विरोधी खेमों से साफ दूरी बनाकर अपने विश्वसनीय गठबंधन ढांचे को मजबूत करना चाहती है. यह माना जा रहा है कि यह फैसला आगे आने वाले विधानसभा और लोकसभा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है. 

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