Aurangabad arms smuggling Case 2026: बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने 2006 के चर्चित औरंगाबाद हथियार तस्करी मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 44 वर्षीय सैयद आकिफ सैयद जफरुद्दीन को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है. अदालत ने जमानत देते समय मुख्य रूप से दो आधारों को ध्यान में रखा: पहला, आकिफ के खिलाफ अपराध में शामिल होने के पर्याप्त सबूतों की कमी और दूसरा, उसका पिछले 20 वर्षों से जेल में बंद होना.
न्यायमूर्ति सुमन श्याम और न्यायमूर्ति श्याम सी. चांडक की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जो यह साबित करे कि आकिफ हथियारों और विस्फोटकों की खरीद या तस्करी में सीधे तौर पर शामिल था.
2006 का मामला
यह मामला मई 2006 का है, जब महाराष्ट्र एटीएस ने येवला-छत्रपति संभाजीनगर रोड पर छापेमारी कर 16 एके-47 राइफलें, 3200 कारतूस और 43 किलो आरडीएक्स जब्त किया था. एटीएस का दावा था कि यह भारी मात्रा में असलहा 2002 के गुजरात दंगों का बदला लेने और आतंकी साजिश रचने के लिए इकट्ठा किया गया था, जिसमें आकिफ को भी साजिशकर्ता बताया गया था.
आरोप को साबित करने के लिए नहीं पेश किए गए सबूत
आकिफ के वकील मुबीन सोल्कर ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को हथियारों के परिवहन की कोई जानकारी नहीं थी और न ही उसने किसी बड़ी आतंकी साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई थी.अदालत ने यह भी नोट किया कि अभियोजन पक्ष ने आकिफ की नेपाल यात्रा और एक कथित ईमेल के आधार पर उसे 'जिहाद' से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन इन दावों के समर्थन में कानूनन पुख्ता सबूत पेश नहीं किए गए.
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खंडपीठ ने कहा कि आकिफ पहले ही 40 साल की संभावित सजा का आधा हिस्सा यानी 20 साल जेल में काट चुका है, इसलिए उसकी अपील लंबित रहने के दौरान उसे सलाखों के पीछे रखना उचित नहीं है. हाईकोर्ट ने आकिफ को 2 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतें जमा करने पर रिहा करने का निर्देश दिया है.
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