- नासिक कोर्ट में सरकारी वकील ने अशोक खरात पर पांच लोगों की नरबलि देने का गंभीर संदेह जताया है.
- तलाशी में हथियार, कारतूस, कस्तूरी और अघोरी प्रथाओं से जुड़े संदिग्ध सामान बरामद हुए हैं.
- आरोपी पर 30 वर्षों तक युवतियों का यौन शोषण करने और पीड़ितों की संख्या बढ़ने का आरोप है.
Ashok Kharat Human Sacrifice Case: अशोक खरात केस में जांच आगे बढ़ने के साथ गंभीर और चौंकाने वाले आरोप सामने आ रहे हैं. नासिक कोर्ट में सरकारी वकील ने यह दलील दी कि आरोपी पर पांच लोगों की नरबलि देने का संदेह है. तलाशी में मिले हथियारों, कारतूसों और कथित अघोरी प्रथाओं से जुड़े सामानों ने मामले को और उलझा दिया है. अदालत में दोनों पक्षों की दलीलों के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है.
'नरबलि का शक और हथियारों के सबूत'
सरकारी वकील शैलेंद्र बागड़े ने अदालत में कहा कि अशोक खरात के घर की तलाशी के दौरान कई संदिग्ध सामग्री मिली है. उनके अनुसार, शासकीय मुहर बरामद हुई है. जब्त पिस्टल से पांच गोलियां चलाई गई थीं, जिन्हें नरबलि जैसे कृत्य में इस्तेमाल किए जाने का संदेह है. साथ ही 21 जिंदा कारतूस मिले हैं. आरोपी अघोरी प्रथाओं का पालन करता था. उसके पास कस्तूरी मिली है, जिसकी जांच में पता लगाया जाएगा कि क्या उसने हिरण का शिकार किया था. स्थान पर दिखे बाघ और सांप असली थे या नकली, इसकी भी जांच जारी है.
सरकारी वकील ने बताया कि जैसे‑जैसे जांच बढ़ रही है, पीड़ित महिलाओं की संख्या भी सामने आ रही है. आरोप है कि 67 वर्षीय खरात ने 30 वर्ष तक उम्र की युवतियों का शोषण किया.
जांच में मिले पैसे, हथियार और डिवाइस
तलाशी में पुलिस को छह लाख रुपये नकद, एक काला रिवॉल्वर जिस पर भारत सरकार का चिन्ह था, एक ऐपल लैपटॉप और एक डीवीआर भी मिला. शिवनिका संस्थान की संपत्ति और वहां चलने वाली गतिविधियों की गहराई से जांच के लिए IO किरण सूर्यवंशी ने आरोपी की और कस्टडी मांगी.
आरोपी के वकील ने जांच पर उठाए सवाल
अशोक खरात के वकील सचिन भाटे ने सरकारी पक्ष की दलीलों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पिछले सात दिनों की जांच संदिग्ध है. वीडियो पहले ही मीडिया और सोशल मीडिया पर लीक हो चुके हैं. लैपटॉप और डीवीआर का जिक्र है, लेकिन पेनड्राइव का क्यों नहीं? पिस्टल का लाइसेंस था और सारे सामान जब्त कर लिए गए हैं, तो कस्टडी बढ़ाने की जरूरत क्यों? संपत्ति के दस्तावेज तो रजिस्ट्रार कार्यालय से भी मिल सकते हैं.
पीड़ित पक्ष में कहा- न्याय मिले
पीड़ित पक्ष के वकील एम.वाई. काले ने कहा कि यह मामला समाज में चर्चा का विषय है. उनके अनुसार, यौन शोषण और धोखाधड़ी की जांच के लिए आरोपी की पुलिस कस्टडी जरूरी है. तभी पीड़ितों को न्याय मिल सकेगा.
अशोक खरात का कोर्ट में बयान
कस्टडी आदेश सुनाए जाने से पहले अशोक खरात ने अदालत में कहा कि “मुझे बाघ और सांपों के बारे में कुछ नहीं पता, यह पहली बार सुन रहा हूं. मैं मंदिर केवल शिवरात्रि या सावन जैसे अवसरों पर जाता था.”
पांच दिन की पुलिस कस्टडी
सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने आरोपी अशोक खरात को 29 मार्च तक पाँच दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजने का आदेश दिया. जांच एजेंसियों का कहना है कि अभी कई पहलुओं की जांच बाकी है, और कस्टडी से इस मामले में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं.














