राजकीय शोक के बीच 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा, क्या अजित पवार के विभाग में हुआ बड़ा खेल?

राजकीय शोक के दौरान महाराष्ट्र में 75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा देने का मामला तूल पकड़ रहा है. अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप और दोषियों पर MCOCA लगाने की मांग की.

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75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा, फाइलों पर 28 जनवरी को हस्ताक्षर
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  • महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने 75 अल्पसंख्यक स्कूलों को अचानक मान्यता मिलने का आरोप लगाया
  • स्कूलों की फाइलों पर 28 जनवरी को हस्ताक्षर हुए थे, जो राजकीय शोक के दौरान था
  • आयोग ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले में तत्काल हस्तक्षेप और कड़ी जांच की मांग की है
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मुंबई:

महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने आरोप लगाया है कि राजकीय शोक के दौरान 75 अल्पसंख्यक स्कूलों को अचानक से मान्यता दी गई. इस मामले में उन्होंने नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच की मांग की और राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से हस्तक्षेप करने की अपील की. साथ ही आरोपियों के विरुद्ध MCOCA के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है.

75 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा, फाइलों पर 28 जनवरी को हस्ताक्षर

मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया गया कि इन स्कूलों की फाइलों पर 28 जनवरी को हस्ताक्षर हुए. उसी दिन जब तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बारामती में प्लेन क्रैश में निधन हुआ और राज्य में राजकीय शोक घोषित था. राजकीय शोक के दौरान सरकारी कामकाज और फाइलों पर हस्ताक्षर होने से अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

अल्पसंख्यक आयोग की मांग, कठोर कार्रवाई और MCOCA

अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने मुख्यमंत्री फडणवीस से मामले में हस्तक्षेप की अपील की है. उनकी मांग है कि इस धांधली में शामिल दोषियों के खिलाफ MCOCA के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए.

RTE से बचने के लिए दर्जे के दुरुपयोग का आरोप

आरोप है कि कई स्कूल अल्पसंख्यक दर्जा का उपयोग शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून की शर्तों और नियमों से बचने के लिए करते हैं. वर्तमान में राज्य में लगभग 8,500 स्कूलों को अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त है. विवादित 75 स्कूलों को दी गई अचानक मान्यता अब जांच के घेरे में है, क्योंकि अल्पसंख्यक विकास विभाग तत्कालीन दिवंगत उपमुख्यमंत्री के पास ही था.

राजकीय शोक में फाइल निपटारे पर सवाल

राजकीय शोक की अवधि में इतनी बड़ी संख्या में फाइलों का निपटारा होना प्रशासनिक नैतिकता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाता है.

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