वसुंधरा राजे के कथित फर्जी पत्र पर सियासी घमासान, MP कांग्रेस IT सेल के कार्यकर्ताओं की हिरासत ने बढ़ाया विवाद

Vasundhara Raje Fake Letter: वसुंधरा राजे के कथित फर्जी पत्र को लेकर राजस्थान पुलिस ने भोपाल से कांग्रेस IT सेल के 3 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. कांग्रेस नेताओं ने कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताया. पढ़िए पूरी खबर.

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वसुंधरा राजे के फर्जी पत्र पर हंगामा, भोपाल से 3 कांग्रेस कार्यकर्ता हिरासत में

Vasundhara Raje Fake Letter: राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से जुड़े कथित फर्जी पत्र के मामले ने मध्यप्रदेश और राजस्थान की सियासत को गरमा दिया है. इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस द्वारा भोपाल पहुंचकर कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद विवाद और गहराता जा रहा है. कांग्रेस ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है और आरोप लगाया है कि असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इसे कानून और लोकतंत्र दोनों के खिलाफ करार दिया है.

आईटी सेल के तीन कार्यकर्ता हिरासत में

मामले को लेकर राजस्थान पुलिस ने भोपाल पहुंचकर कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस संगठन में नाराजगी फैल गई. कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में कांग्रेस का एक प्रतिनिधि मंडल भोपाल के एमपी नगर थाने पहुंचा और पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए. नेताओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को लेकर चुनिंदा लोगों को निशाना बनाना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि कानून की भावना के भी खिलाफ है.

क्या है पूरा मामला?

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, पूरा विवाद 15 अप्रैल से जुड़ा है. उस दिन पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने एक ट्वीट किया था, जिसमें नारी शक्ति वंदन विधेयक 2023 के पारित हो जाने के बाद उसे दोबारा लाने की आवश्यकता पर सवाल उठाए गए थे. यह ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और राजस्थान की मीडिया में भी चर्चा का विषय बना. बाद में 18 अप्रैल को वसुंधरा राजे ने उक्त ट्वीट डिलीट करते हुए इसे फर्जी पत्र बताया. इसके बाद इस ट्वीट और कथित पत्र को साझा करने के आरोप में भोपाल के कांग्रेस आईटी सेल कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया.

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विवेक तन्खा ने उठाए कानूनी सवाल

राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने इस कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पिछले 27 घंटों से मध्यप्रदेश साइबर पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को बिना किसी ठोस कारण के हिरासत में रखा है. उन्होंने इसे चौंकाने वाला बताते हुए कहा कि जिस ट्वीट को लाखों लोगों ने देखा और साझा किया, उसी के आधार पर चुनिंदा लोगों को हिरासत में लेना न्यायसंगत नहीं है. विवेक तन्खा ने चेतावनी दी कि यदि कार्यकर्ताओं को रिहा नहीं किया गया तो इस कथित अवैध हिरासत और प्रक्रिया को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

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लोकतंत्र पर हमला : हरीश चौधरी

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने भी पुलिस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को 24 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रखना निंदनीय और अलोकतांत्रिक है. उनका कहना था कि लोकतंत्र में असहमति को दबाने का यह तरीका स्वीकार्य नहीं हो सकता. हरीश चौधरी ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए तत्काल रिहाई और निष्पक्ष जांच की मांग की.

जीतू पटवारी का बीजेपी पर हमला

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को बीजेपी के लिए असहज करने वाला बताया. उन्होंने कहा कि वसुंधरा राजे के कथित पत्र ने महिला आरक्षण की आड़ में चल रहे कथित षड्यंत्र को उजागर किया है. पटवारी ने सवाल उठाया कि जब वही सामग्री लाखों लोगों ने साझा की है, तो कार्रवाई सिर्फ कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ही क्यों की जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि पत्र गलत है तो सभी पर एफआईआर होनी चाहिए और यदि सही है तो सच्चाई को दबाने का प्रयास बंद होना चाहिए.

क्यों बढ़ रहा राजनीतिक तनाव

कांग्रेस का कहना है कि राजस्थान पुलिस के नाम पर मध्यप्रदेश में इस तरह की कार्रवाई संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों पर भी सवाल खड़े करती है. पार्टी नेताओं का आरोप है कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक सवाल उठाना अपराध नहीं हो सकता. कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रही है, जबकि दूसरी ओर भाजपा समर्थक इसे फर्जी दस्तावेज फैलाने का मामला बता रहे हैं.

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अब आगे क्या?

फिलहाल हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं से पूछताछ जारी है और राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है. कांग्रेस ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि कार्यकर्ताओं को शीघ्र रिहा नहीं किया गया, तो अदालत का दरवाजा खटखटाया जाएगा. इस मामले ने आने वाले दिनों में सियासी टकराव और कानूनी बहस को और तेज करने के संकेत दे दिए हैं, जहां एक ओर कानून की प्रक्रिया है, तो दूसरी ओर अभिव्यक्ति की आजादी का सवाल.

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