Budget 2026: बजट पर टिकीं मध्य प्रदेश के आम आदमी की नजरें, महंगाई और टैक्स में राहत की सबसे बड़ी उम्मीद

Union Budget 2026: सिंगरौली हो, इंदौर या शिवपुरी, हर जगह लोगों की अपेक्षा लगभग एक जैसी है. महंगाई, टैक्स, रोजगार और किसानों की स्थिति आज भी लोगों की सबसे बड़ी चिंता है. अब सबकी निगाहें 1 फरवरी के बजट पर हैं कि क्या इस बार सरकार वाकई में ऐसा फैसला ले पाएगी जो लोगों की जेब और उम्मीदों दोनों को राहत दे.

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Budget 2026: बजट पर टिकीं मध्य प्रदेश के आम आदमी की नजरें, महंगाई और टैक्स में राहत की सबसे बड़ी उम्मीद

Budget 2026: यूनियन बजट 2026 (Union Budget 2026) को लेकर इस बार आम जनता की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं. महंगाई में लगातार बढ़ोतरी, रोजगार के सीमित अवसर और रोजमर्रा के खर्चों का दबाव लोगों को राहत की उम्मीद दिला रहा है. 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश करने जा रही हैं और पूरे देश की निगाहें इस बार के ऐलान पर टिकी हैं. मध्यप्रदेश के अंतिम छोर पर बसे सिंगरौली में भी बजट को लेकर खास उत्साह दिख रहा है. उर्जाधानी के नाम से पहचाने जाने वाले इस जिले में आम दुकानदारों से लेकर नौकरीपेशा लोगों और गृहिणियों तक हर कोई इंतजार कर रहा है कि क्या इस बार बजट महंगाई की मार झेल रहे आम परिवारों को कुछ राहत देगा. लोगों का कहना है कि सरकार को इस बार सिर्फ आंकड़ों पर नहीं, आम लोगों के असली हालात पर ध्यान देना चाहिए.

Budget 2026: बजट 2026 से उम्मीदें

इंदौर: टैक्स में राहत और सीनियर सिटीजन कोटा की बहाली की मांग

मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भी बजट को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.
कई लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार इनकम टैक्स में छूट मिले ताकि मध्यम वर्ग को राहत मिल सके.
लोगों का कहना है कि हर बजट में सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग पर पड़ता है, लेकिन राहत कम मिलती है.
इंदौर के लोगों ने रेलवे में सीनियर सिटीजन कोटा वापस शुरू करने की भी मांग की है. इसके अलावा महंगाई से राहत भी लोगों की प्राथमिक मांगों में शामिल है.

शिवपुरी के युवाओं की मांग : रोजगार और शिक्षा पर बड़ा ऐलान

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट आने वाला है और युवाओं की अपेक्षाएँ काफी बढ़ी हुई हैं. शिवपुरी के युवाओं का कहना है कि:रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए. परिवहन और कनेक्टिविटी में सुधार हो. कंपनियों को अनुमति देते समय पर्यावरण को प्राथमिकता दी जाए. कई युवाओं ने यह भी कहा कि फ्री योजनाएँ उनकी हिस्सेदारी को कम करती हैं, इसलिए आवश्यकता आधारित योजनाएँ ही ज्यादा प्रभावी हैं.
उनका मानना है कि सरकार का बजट युवा-उन्मुख (Youth Oriented) होना चाहिए.

सिंगरौली हो, इंदौर या शिवपुरी-हर जगह लोगों की अपेक्षा लगभग एक जैसी है. महंगाई, टैक्स, रोजगार और किसानों की स्थिति आज भी लोगों की सबसे बड़ी चिंता है. अब सबकी निगाहें 1 फरवरी के बजट पर हैं कि क्या इस बार सरकार वाकई में ऐसा फैसला ले पाएगी जो लोगों की जेब और उम्मीदों दोनों को राहत दे.

किसानों की भी उम्मीद : कृषि क्षेत्र को मिलनी चाहिए राहत

किसान परिवारों से आने वाले नौकरीपेशा और ग्रामीण लोग चाहते हैं कि इस बार बजट में किसानों को राहत के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ. सब्सिडी, समर्थन मूल्य और कृषि के खर्चों में कमी जैसी घोषणाओं की उम्मीदें जताई जा रही हैं. इसके साथ ही आम परिवार यह भी चाह रहा है कि बचत को बढ़ावा देने के लिए सरकार नए कदम उठाए.

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