- ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में पुलिस गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में
- पुलिस का दावा है कि व्हाट्सऐप चैट और मेडिकल सबूतों के आधार पर गिरिबाला सिंह पर दहेज प्रताड़ना के आरोप हैं
- पुलिस ने आरोप लगाया है कि गिरिबाला सिंह ने जांच में सहयोग नहीं किया और जांच को प्रभावित किया
Giribala Singh Bail Cancellation:भोपाल की चर्चित मॉडल ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में अब पुलिस ने पूर्व जज और ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत रद्द कराने के लिये मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है. राज्य सरकार की ओर से दायर आवेदन में कहा गया है कि निचली अदालत में 15 मई को जिस दिन FIR दर्ज हुई, उसी दिन बिना तथ्यों की बारीक जांच-पड़ताल किए गिरिबाला सिंह को अग्रिम ज़मानत दे दी, जबकि केस में व्हाट्सऐप चैट,मेडिकल एविडेंस, परिजनों के बयान, दहेज प्रताड़ना के आरोप और नवविवाहिता की संदिग्ध मौत जैसे गंभीर तथ्य मौजूद थे.पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा है कि सेशन कोर्ट ने ट्विशा और उसके माता-पिता के बीच हुई व्हाट्सऐप चैट को ठीक से देखे बिना ही ज़मानत दे दी. आवेदन में दावा किया गया है कि इन चैट्स में गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ “स्पष्ट आरोप” हैं और इन्हीं से यह सामने आता है कि ट्विशा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था. पुलिस का कहना है कि इतने गंभीर रिकॉर्ड के बावजूद अग्रिम ज़मानत देना कानून और तथ्यों दोनों की गंभीर अनदेखी है.
शादी के महज 5 महीने बाद मौत, पुलिस ने उठाया बड़ा कानूनी आधार
राज्य सरकार की ओर से एक बड़ा कानूनी आधार भी उठाया गया है. पुलिस ने कहा है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 118 के तहत अगर किसी महिला की शादी के सात साल के भीतर अप्राकृतिक परिस्थितियों में मौत होती है, तो कानून के दायरे में सीधे पति और ससुराल वाले शक के घेरे में आ जाते हैं. ट्विशा की शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी और उसकी मौत 12-13 मई 2026 की रात हुई यानी शादी के सिर्फ पांच-छह महीने बाद. पुलिस का आरोप है कि निचली अदालत ने इस अहम कानूनी पहलू को नज़रअंदाज़ कर दिया.
सोशल मीडिया पर 'चुनिंदा' CCTV क्लिप्स लीक करने का आरोप
सबसे गंभीर आधार सबूतों से कथित छेड़छाड़ का है. पुलिस के मुताबिक 13 मई को गिरिबाला सिंह के घर का CCTV फुटेज जांच एजेंसी ने ज़ब्त कर लिया था, लेकिन गिरिबाला सिंह के पास पहले से CCTV फुटेज सुरक्षित था.
पुलिस के मुताबिक यह कदम जांच को प्रभावित करने और जनमत को मोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. राज्य ने इसे भी ज़मानत रद्द करने का मजबूत आधार बताया है.
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पुलिस के नोटिस को किया नजरअंदाज, नौकर ने भी किया मना
हाईकोर्ट में दायर आवेदन में पुलिस ने गिरिबाला सिंह पर जांच में सहयोग न करने का आरोप भी लगाया है. पुलिस के अनुसार 13 और 14 मई को उन्हें नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने के लिये बुलाया गया, लेकिन वे नहीं आईं.अग्रिम ज़मानत मिलने के बाद भी उन्हें 20 मई को व्हाट्सऐप पर नोटिस भेजा गया, लेकिन संदेश देखने के बावजूद उन्होंने जवाब नहीं दिया. 21 मई को जब कटारा हिल्स थाने के सब इंस्पेक्टर उनके घर पहुंचे, तो उनके नौकर पंकज झारिया ने बताया कि वे घर पर नहीं हैं और नोटिस लेने से भी मना कर दिया. पुलिस का कहना है कि यह अग्रिम ज़मानत की शर्तों का खुला उल्लंघन है. आवेदन में लिखा गया है कि गिरिबाला सिंह जानबूझकर पूछताछ से बच रही हैं, टालमटोल कर रही हैं और जांच एजेंसी के निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं. पुलिस ने हाईकोर्ट से कहा है कि ऐसे “ठोस और गंभीर हालात” मौजूद हैं, जिनके आधार पर उनकी अग्रिम ज़मानत रद्द की जानी चाहिये.
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100 मीटर दूर था पुलिस थाना, फिर भी पुलिस को नहीं दी सूचना
पुलिस ने एक और चौंकाने वाला आधार रखा है. आवेदन में कहा गया है कि गिरिबाला सिंह खुद 35 साल से अधिक समय तक न्यायिक सेवा में रहीं, इसलिए उन्हें अच्छे से पता था कि ऐसी स्थिति में सबसे पहले पुलिस को सूचना दी जानी चाहिये थी.
आवेदन के मुताबिक पोस्टमॉर्टम में ट्विशा की मौत का कारण ligature hanging बताया गया, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों पर blunt force से संभव कई ante-mortem injuries भी पाई गईं. पुलिस का कहना है कि यह मेडिकल तथ्य, दहेज प्रताड़ना और घरेलू क्रूरता के आरोपों के साथ मिलकर मामले को बेहद गंभीर बनाते हैं.
परिजनों के आरोप: गर्भपात के लिए बनाया गया दबाव
पुलिस ने ट्विशा की मां रेखा रानी शर्मा, भाई हर्षित शर्मा और भाभी राशि अबरोल के बयानों का भी हवाला दिया है. इन बयानों में आरोप है कि शादी के बाद से ही समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह ट्विशा को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करते थे और उसके चरित्र पर भी सवाल उठाते थे. आवेदन में यह भी आरोप है कि अप्रैल 2026 में ट्विशा के गर्भवती होने के बाद उसे प्रताड़ित किया गया और मई के पहले सप्ताह में गर्भपात के लिये दबाव बनाया गया.
मौत से चंद मिनट पहले की आखिरी खौफनाक कॉल
पुलिस ने ट्विशा की आखिरी फोन कॉल को भी अहम तथ्य बताया है. आवेदन के अनुसार 12 मई की रात करीब 9:41 बजे ट्विशा ने अपनी मां को फोन किया था. परिजनों ने फोन पर समर्थ सिंह के चिल्लाने की आवाज़ सुनी, जिसके बाद फोन कट गया और मोबाइल स्विच ऑफ हो गया. इसके बाद परिजनों ने समर्थ और गिरिबाला सिंह को कई बार कॉल किया, लेकिन जवाब नहीं मिला. करीब 10:35 बजे गिरिबाला सिंह ने फोन उठाया और बताया कि ट्विशा अब नहीं रही.इन सभी आधारों पर पुलिस ने हाईकोर्ट से मांग की है कि 15 मई को गिरिबाला सिंह को दी गई अग्रिम ज़मानत का आदेश रद्द किया जाए. राज्य ने अदालत से यह भी प्रार्थना की है कि गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के निर्देश दिये जाएं और उन्हें हिरासत में भेजा जाए. पुलिस का तर्क है कि यह सिर्फ एक ज़मानत का मामला नहीं, बल्कि एक नवविवाहिता की संदिग्ध मौत, दहेज प्रताड़ना, मेडिकल चोटों, सबूतों से कथित छेड़छाड़ और जांच में असहयोग का गंभीर मामला है.
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