Top Maoist Leader Ganapathy: तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बुधवार शाम नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद देश के एक बड़े नक्सली गणपति के आत्मसमर्पण को लेकर चर्चा तेज हो गई. हालांकि, मुख्यमंत्री और डीजीपी कार्यालय की ओर से कहा गया कि यह बैठक पुलिस बल को मजबूत और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर हुई थी.
दो साल में 591 माओवादियों ने हथियार छोड़कर
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, बैठक के दौरान सीएम रेवंत रेड्डी ने गृह मंत्री अमित शाह को नक्सलियों के आत्मसमर्पण और प्रदेश से जुड़े अन्य मुद्दों के बारे में जानकारी दी. सीएम ने बताया कि पिछले दो साल में तेलंगाना में 591 माओवादियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापसी की है. आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े नक्सली भी शामिल हैं. सरकार की ओर से सभी को पुनर्वास योजना का लाभ दिया जा रहा है. इस बैठक में तेलंगाना के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी, इंटेलिजेंस के अतिरिक्त डीजीपी विजय कुमार, एसआईबी की आईजीपी बी. सुमति और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी. शेषाद्रि भी मौजूद थे.
14 साल महासचिव पद रहे गणपति
सीएम रेड्डी और गृह मंत्री शाह की बैठक में तेलंगाना के शीर्ष पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी से वरिष्ठ माओवादी नेता मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति के आत्मसमर्पण की चर्चा तेज हो गई. कहा जा रहा है कि गणपति जल्द ही हथियार डालकर सरेंडर कर सकते हैं. गणपति वर्ष 2004 से 2018 तक प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के महासचिव रह चुके हैं. अगर, उनका आत्मसमर्पण होता है तो इसे देश में माओवाद के अंत के रूप में भी देखा जा सकता है.
गणपति पर 3.5 करोड़ का इनाम, बीमार होने की आशंका
तेलंगाना के करीमनगर जिले के रहने वाले गणपति पहले एक स्कूल शिक्षक थे. साल 1983 में वे भूमिगत हो गए थे और बाद में भारत में माओवादी आंदोलन के प्रमुख रणनीतिकारों में शामिल हो गए. साल 2004 में हुए पीपुल्स वार ग्रुप और माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर के विलय में गणपति की भूमिका अहम रही, जिससे सीपीआई (माओवादी) का गठन हुआ. 70 साल की उम्र पार कर चुके गणपति पर कई राज्यों में 3.5 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित है. माना जाता है कि वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं.
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परिजनों ने की घर आने की अपील
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हाल ही में वरिष्ठ माओवादी कमांडर थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी के हैदराबाद में तेलंगाना डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद गणपति के आत्मसमर्पण की चर्चा उठी थी. तेलंगाना के जगत्याल जिले में रहने वाले गणपति के परिजनों ने भी उनसे घर लौटकर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है. साथ ही परिजनों ने सरकार से अनुरोध किया है कि अगर, गणपति आत्मसमर्पण करते हैं तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए.
लाल आतंक के खिलाफ बड़ा कदम
हालांकि, तेलंगाना पुलिस ने नक्सली गणपति से किसी भी तरह की बातचीत या आत्मसमर्पण की संभावना की पुष्टि नहीं की है. अगर, गणपति आत्मसमर्पण करते हैं, तो यह देश में लगभग चार दशकों से जारी लाल आतंक के खिलाफ लड़ाई में एक और बड़ा कदम साबित हो सकता है.














